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रेलवे अस्पताल में भगवान भरोसे मरीज, नहीं मिल रही दवाई, न डॉक्टर

रेलवे अस्पताल में भगवान भरोसे मरीज, नहीं मिल रही दवाई, न डॉक्टर  

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Railway Central Hospital

Railway Central Hospital

जबलपुर. मरीजों के लिए आवश्यक दवाओं का टोटा है तो वहीं दूसरी ओर ऑपरेशन के लिए पीड़ितों को इंतजार करना पड़ रहा है। पीड़ितों को बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही है। यह स्थिति है रेलवे के केंद्रीय अस्पताल की। अस्पताल में शुगर, हार्ट पेसेंट जैसी गम्भीर बीमारियों के लिए आवश्यक दवाएं कई दिनों से नहीं हैं। इसकी वजह है कि दवाइयों की खरीदी नहीं हुई है। जिसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि रेलवे अस्पताल में रोजाना ओपीडी में करीब 450 से 500 मरीज पहुंचते हैं।

रेल प्रशासन सेहत से कर रहा अनदेखी
डब्ल्यूसीआरईयू के मंडल अध्यक्ष बीएन शुक्ला ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों के सेहत की अनदेखी कर रहा है। इसका खामियाजा रेल कर्मियों व उनके परिजन को भुगतना पड़ रहा है। इसे लेकर प्रतिनिधिमंडल अस्पताल प्रबंधन और रेल प्रशासन से मुलाकात करेगा। मरीजों की समस्याओं और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने मांग करेगा।

आयरन और बी कॉम्पलेक्स तक नहीं
बताया जाता है विभिन्न बीमारियों और उनके इलाज के लिए रेल अस्पताल में 100 से अधिक प्रकार की दवाईयां मरीजों को दी जाती हैं। इसमें से केवल चालीस फीसदी दवाई ही उपलब्ध हैं। गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली आयरन कैप्सूल, बीपी की दवाइयां, आइंटमेंट जेल, टॉनिक, बी कॉम्पलेक्स, दर्दनिवारक दवाइयां, एंटी बायॉटिक जैसी दवाएं उपलब्ध नहीं है। दवाइयों के रूप में केवल साधारण पेरासीटेमाल और सर्दी जुखाम के सिरप उपलब्ध हैं।

लम्बी मिल रही डेट
पीड़ितों का कहना है कि घायल हुए कर्मचारियों को ऑपरेशन के लिए भी इंतजार कराया जा रहा है। एक से दो माह की डेट दी जा रही है। ऐसे में समय पर ऑपरेशन न होने पर मरीजों के स्वास्थ्य पर और भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है। अस्पताल में कटनी, नरसिंहपुर, गाडरवारा, मैहर, सतना यदि स्थानों के साथ ही दूसरे मंडल से भी कर्मचारी और उनके परिवार इलाज के लिए आते हैं।

केस - 01
सरई में टेक्नीशियन बेड़ीलाल का 21 साल का बेटे दुर्घटना में घायल हो गया। परिजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल प्रबंधन इलाज के नाम पर टाल मटोली करता रहा।

केस - 02
एनकेजे में पदस्थ एक गैंगमेन हार्निया की बीमारी से परेशान है। इलाज के लिए रेलवे अस्पताल पहुंचे। ऑपरेशन की स्थिति बनने पर उन्हें भी डेढ माह बाद आने के लिए कहा गया है। जबकि पीड़ित जल्द ऑपरेशन कराना चाहता है।

केस - 03
ट्रेकमैन बद्री रजक किडनी की समस्या से परेशान हैं। उन्होंने चिकित्सकों को दिखाया। किडनी में स्टोन होना पाया गया। ऑपरेशन करने के लिए 16 अक्टूबर की डेट दी गई। इस बीच पीड़ित मैहर में काम के दौरान दो बार दर्द से परेशान होकर ट्रैक पर गिर चुका है।

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