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जबलपुर. आवास नीति में संशोधन का फायदा शहर के रियल एस्टेट कारोबारियों के साथ ग्राहकों को भी होगा। हाल ही में कैबिनेट बैठक में प्लॉटिंग के लिए दो हेक्टेयर जमीन की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। यानी अब पांच एकड़ से कम भूमि पर भी आवासीय कॉलोनी विकसित हो सकेंगी। इससे शहर के आसपास ही लोगों को घर मिल सकता है। रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों के अनुसार अधिक संख्या में प्लॉटिंग होने से कीमत भी कम होगी। अभी की स्थिति में पांच एकड़ से ज्यादा जमीन तलाशने के लिए बिल्डर्स को जद्दोजहद करनी पड़ती है। जमीन भी शहर से दूर मिलती है। जबकि, ग्राहक शहर में ही आवास चाहते हैं। इसका फायदा अवैध कॉलोनाइजर उठाते हैं। आवास नीति में संशोधन से अवैध कॉलोनियों के निर्माण पर रोक लगेगी।
ऐसे मिलेगा फायदा
शहर के आस-पास कम क्षेत्रफल में प्लॉटिंग होने पर प्लॉट और मकानों की संख्या बढ़ेगी। अर्थशास्त्र में मांग और पूर्ति का नियम है। इसके अनुसार वस्तु की मात्रा अधिक होने पर कीमत नीचे आती है। जबकि कम मात्रा के कारण मांग और कीमत बढ़ती है। जबलपुर क्रेडाई के अध्यक्ष धीरेश खरे के अनुसार कई कारोबारियों के लिए पांच एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदना कठिन होता है। वे अब छोटी जगहों पर प्लॉटिंग कर सकेंगे।
कम होगी लागत
बड़ी कॉलोनियों में ओपन एरिया ज्यादा होता है। उसमें बगीचा, सड़क, नाली सहित अन्य चीजों के लिए जगह छोडऩा पड़ता है। मूलभूत सुविधाएं भी ज्यादा देना पड़ता है। इससे प्रोजेक्ट की लागत बढ़ती है। बिल्डर और क्रेडाई जबलपुर के सचिव दीपक अग्रवाल के अनुसार कम जगह में कॉलोनी बनने पर डेवलपमेंट एरिया कम होगा। छोटे कैम्पस की साइट में सुरक्षा भी बेहतर हो सकती है।
जिले में प्रोजेक्ट
150 से ज्यादा छोटे-बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट
70-80 फीसदी प्रोजेक्ट पांच से दस एकड़ क्षेत्रफल में
20-30 फीसदी प्रोजेक्ट का क्षेत्रफल 15-20 एकड़ है
सगड़ा, अमखेरा, अधारताल, कटंगी रोड, बिलहरी में बढ़ेगी बसाहट
Published on:
13 Oct 2019 06:28 pm
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