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शिक्षा अधिकार अधिनियम: दाखिले के बाद 1400 छात्रों ने छोड़ी आरटीइ सीटें

50 फीसदी ने नहीं लिया स्कूलों में प्रवेश, 4776 आवेदकों ने कराया था सत्यापन  

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Right to education act

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जबलपुर। शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में नि:शुल्क दाखिले के बाद भी 1400 छात्रों ने सीटें छोड़ दी हैं। ऐसा कम ही देखा जाता है कि जब सीट आवंटन होने के बाद बड़ी संख्या में अभिभावकों ने बच्चों को प्रवेश नहीं दिलाया। आरटीइ के तहत इस बार 50 फीसदी भी सीटें नहीं भर पाई हैं। 44 फीसदी सीटों पर प्रवेश हुए हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बार फिर से मौका देने का निर्णय लिया है। जिले में आरटीइ के तहत 720 स्कूलों को चिह्नित किया गया है। इन स्कूलों में शिक्षा से वंचित ऐसे परिवारों के बच्चों के लिए 25 फीसदी सीटें आरक्षित की गई हैं।

7654 सीटें की गई रिजर्व

जानकारों के अनुसार आरटीइ के तहत जिले के स्कूलों में 7654 सीटे वंचित वर्ग के लिए रिजर्व की गई हैं। जुलाई में ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया का आयोजन किया गया था। इन सीटों के एवज में 5658 अभिभावकों ने ही आवेदन किया। जांच के दौरान दस्तावेजों की कमी आदि कारणों के चलते 882 अभिभावकों के फार्म रिजेक्ट कर दिए गए। इस बार आवेदन अधिक आने की सम्भावना व्यक्त की जा रही थी, लेकिन यह संख्या कम थी।

प्रदेश में 20 हजार छात्रों ने छोड़ी सीटें
बताया जाता है ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से प्रदेशभर के करीब 1.40 लाख स्टूडेंट्स को सीटें आवंटित की गई थीं। यदि प्रदेश की स्थिति देखी जाए तो यहां करीब 20 हजार छात्रों ने दाखिले के सीटों को छोड़ दिया। इसकी एक बड़ी वजह प्रवेश प्रक्रिया का देर से शुरू होना है। कई छात्रों ने दूसरे स्कूलों में प्रवेश ले लिया था।

कई छात्रों ने प्रवेश की सीटों को छोड़ दिया है। इसकी वजह उनकी पसंद का स्कूल न मिलना हो सकता है। छात्र हित को देखते हुए द्वितीय चरण में आवेदक को स्कूल की च्वाइस अपडेट का विकल्प प्रदान किया गया है।
- डॉ.आरपी चतुर्वेदी, जिला परियोजना समन्वयक

यह स्थिति
स्कूलों की संख्या- 722
आरटीइ सीटें- 7654
आवेदन आए- 5658
सत्यापन हुए- 4776
प्रवेशित हुए छात्र- 3379

इसलिए बनी दूरी
●वार्ड से स्कूल दूर होना
●पसंद का स्कूल न मिल पाना
●दूसरे स्कूलों में पहले से प्रवेश
●बच्चे और परिवार की सहमति