
जबलपुर. रिंग रोड के निर्माण में पांच हजार वृक्षों को अपनी आहूति देनी पडे़गी। रोड के बीच में छोटे-बडे़ वृक्ष काटे जाएंगे। एनएचएआई ने इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी है। दूसरी तरफ इन वृक्षों के बदले कम से कम 50 हजार नए पौधे लगाने का दावा किया गया है, मगर इससे पहले हाइवे पर पौधों की हालत ठीक नहीं है। सड़क बनने के बाद उन्हें कोई देखता तक नहीं है।
शहर के चारों तरफ बन रही रिंग रोड का निर्माण शुरू हो गया है। फेज-एक में निर्माण का काम चल रहा है। पुल एवं पुलियों से इसकी शुरूआत हो चुकी है। इस फेज में जितना हिस्सा बनना है, उसके रास्ते में आने वाले वृक्षों की कटाई भी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से कराई जा रही है। बारिश के उपरांत फेज-3 में भी यह काम शुरू हो जाएगा। क्येांकि यहां भी पेड़ों की कटाई की अनुमति मिल चुकी है। अब केवल फेज 2, 3 और 5 में अनुमति ली जाएगी।
ढाई हजार वृक्ष आएंगे बीच में
अभी एनएचएआई की तरफ से 25 हजार वृक्षों की कटाई की मांग की गई है। छोटे और बडे़ आकार वाले यह वृक्ष 33 गांवों में लगे हैं। इसमें जबलपुर और शहपुरा तहसील के मानेगांव से राष्ट्रीय राजमार्ग 45 तक का क्षेत्र शामिल है। दोनों ही तहसीलों के 12 गांव के आसपास यह वृक्ष लगे हैं। इनकी संख्या एक हजार 170 है। वहीं 21 गांव पनागर और कुंडम तहसील के अंतर्गत आते हैं। इनकी संख्या 13 सौ है। इस प्रकार लोगों की सुविधा के लिए दो हजार 480 पेड़ों को अपनी बलि देनी होगी।
सूख गए पौधे, पानी तक नहीं
राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में पुरानी सड़कों पर लगे कई साल पुराने वृक्षों को काट लिया जाता है। एक वृक्ष को काटने में समय नहीं लगता। बिजली चलित आरा मशीन से इन्हें एक घंटे काट दिया जाता है जबकि इन्हें बड़ा होने में 20 से 25 साल लग जाते हैं। सवाल यह है कि जरुरत होने पर इनकी कटाई तो कर दी जाती है साथ ही इनके बदले नए पौधे लगाने के दावे होते हैं। पौधे लगा दिए जाते हैं लेकिन उनकी देखरेख नही होती है।
पुराना मार्ग छायादार होता था
जबलपुर-भोपाल राजमार्ग की बात करें तो पुराना मार्ग छायादार होता था। आम और कोहा के इतने वृक्ष लगे थे कि उनकी छाव के सहारे गरमी में यात्रा करनी आसान होती थी। अब लगभग सारे वृक्ष काट दिएगए हैं। उनके बदले मार्ग के किनारे पौधे लगाए लेकिन अधिकांश जिंदा नहीं हैं। देखरेख के अभाव में वे सूख गए।
पांच और दस गुना अधिक लगेंगे पौधे
शहर के चारों तरफ बन रही 112 किमी की रिंग रोड यातायात को सुगम बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। इसका निर्माण अलग-अलग फेज में किया जा रहा है। ऐसा कोई फेज नहीं है, जहां निजी और सरकारी भूमि पर पेड़ नहीं है। निजी भूमि पर लगे वृक्ष और भूमि का मुआवजा एनएचएआई ने दे दिया गया है। इस बीच प्राधिकरण की तरफ से यह दावा किया जा रहा है कि कुछ जगहों पर एक वृक्ष के बदले पांच यानि पांच गुना पौधे लगाए जाएंगे तो कुछ फेज में यह 10 गुना तक होंगे। इस बात को भी तरजीह दी जा रही है कि ज्यादा से ज्यादा वृक्षों को बचाने का प्रयास किया जाता है।
रिंग रोड के निर्माण के लिए जो डीपीआर बनाई गई है ,उसमें प्रयास किया गया था कि कम से कम वृक्षों को काटा जाए। फिर भी 5 हजार वृक्ष इसके दायरे में आ रहे हैं। जिला प्रशासन से इसकी अनुमति ली जाती है। जितने वृक्ष काटे जा रहे हैं, उनके बदले रोड किनारे पांच से 10 गुना पौधे लगाए जाएंगे। वन क्षेत्र में भी इन्हें लगाया जाएगा।
अमृतलाल साहू, परियोजना निर्देशक, एनएचएआई
Published on:
08 Sept 2023 12:48 pm
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
