22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘रुक जाना नहीं’ योजना में बदइंतजामी का ब्रेक

योजना का प्रचार- प्रसार नहीं करने से छह हजार में से हजार छात्र भी नहीं पहुंचे शिविर में, डीईओ, प्राचार्यों ने योजना को लगाया पलीता, न बच्चों से किया संपर्क  न कराए रजिस्ट्रेशन

2 min read
Google source verification

image

Abhishek Dixit

Jun 14, 2016

admission of nri students

admission of nri students

जबलपुर। बोर्ड परीक्षा में फेल हुए छात्रों के लिए शुरू की गई 'रूक जाना नहीं' योजना के कदम चलने से पहले ही थम गए हैं। निराशा की गर्त में डूबे जिले के 6000 छात्रों को पास होने का मौका देने के लिए शासन ने यह योजना शुरू की। इसके लिए स्पेशल कोचिंग कैम्प आयोजित किए गए, लेकिन जिले के अफसरों की लापरवाही के चलते 1000 बच्चे भी कैम्प में नहीं पहुंचे। जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों ने बच्चों को कैम्प तक लाने में लापरवाही बरती। न तो योजना का प्रचार-प्रसार किया गया न ही फेल छात्रों से शिक्षकों ने संपर्क साधा।

अपने शिक्षकों पर नहीं भरोसा
स्कूल शिक्षा विभाग को खुद अपने शिक्षकों पर भरोसा नहीं था। यही वजह थी कि बच्चों की विशेष पढ़ाई कराने के लिए सरस्वती शिक्षा परिषद के स्कूलों को चुना गया। इन स्कूलों का परीक्षा परिणाम शानदार रहने के चलते यह जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकिबच्चों के न आने से वे भी मायूस रहे।

प्राचार्यों ने खड़े किए हाथ
जानकारी के अनुसार सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों ने संकुल के अंतर्गत आने वाले स्कूलों में फेल 10वीं एवं 12 वीं के छात्रों उनके परिजन से संपर्क नहीं किया। न ही उन्हें कोचिंग कैम्प में रजिस्ट्रेशन कराकर लाने की कवायद की गई। नतीजतन मुट्ठीभर छात्र ही पढऩे आए। हद तो तब हो गई जब कैम्प के शिक्षकों ने खुद अपने स्तर पर प्रयास कर प्राचार्यों से एेसे फेल छात्रों के नाम-पते मांगे तो प्राचार्यों ने हाथ खड़े कर दिए।

15 जून को परीक्षा
15 जून को राज्य ओपन की परीक्षा होनी है। इसमें 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा में असफल बच्चों को फिर मौका दिया जाएगा। प्रदेश से करीब सवा लाख छात्र-छात्राएं फेल हुए हैं। लगभग 30 हजार छात्र-छात्राओं द्वारा रजिस्ट्रेशन कराया गया है। ओपन बोर्ड स्कूल द्वारा परीक्षा के तुरंत बाद से ही डिजीटल मूल्यांकन शुरू कर दिया जाएगा।

हमारी सभी संस्थाओं में शिक्षक जी जान से पढ़ाई में जुटे रहे। शिक्षा विभाग ने बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के प्रयास नहीं किए न ही सहयोगात्मक रवैया अपनाया। फिर भी हमने अपने स्तर पर एेसे बच्चों को ढूंढ़ा और कैम्प तक लाए।
ढालसिंह हनुवत, नोडल अधिकारी

हमने सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों से फेल हुए बच्चों के रिकार्ड मांगे तो प्राचार्यों ने हाथ खड़े कर दिए। योजना का प्रचार-प्रसार न किए जाने के कारण जिले में यह स्थिति बनी। छात्रों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
चंद्रक्रांत मिश्रा, प्राचार्य सशिमं, मझौली

प्राचार्यों द्वारा दोषारोपण किया जा रहा है। यदि कैम्पों में बच्चे नहीं आ रहे हैं तो उन्हें बताया जाना था। इस सम्बंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई।
सतीश अग्रवाल, जिला शिक्षा अधिकारी

ये भी पढ़ें

image