
sabse sasta raincoat kaha milte hai
जबलपुर। शहर में सबसे सस्ते रेनकोट, छाता और बारिश से जुड़े अन्य सामान मिलते हैं। यही वजह है कि लोग यहां दूर दराज से भी खिंचे चले आते हैं। किंतु इस बार इस सस्ते बाजार में वीरानगी छाई है। दुकानदारों ने तो खूब माल भर लिया है, किंतु बारिश ने बाजार में ग्राहक नहीं भेजे हैं। बारिश न होने से दुकानदार रोज ग्राहकों का इंतजार करते देखे जा रहे हैं।
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तिरपाल की बिक्री में भी कमी
मानसून की देर से छाता-रेनकोट कारोबार को झटका
तिरपाल, पॉलीथिन, बरसाती और छाता के कारोबार से जुड़े व्यापारी रोज आसमान पर टकटकी लगाए रहते हैं। लाखों रुपए का निवेश कर चुके इन व्यापारियों के लिए एक-एक दिन काटना मुश्किल हो रहा है। अभी 30 से 40 फीसदी ग्राहक ही उन तक पहुंच रहे हैं। जबलपुर बरसात से जुड़ी चीजों की बिक्री के लिए बड़ी मंडी है। शहर और ग्रामीण इलाकों के साथ नरसिंहपुर, कटनी, सिवनी, दमोह सहित कुछ अन्य जिलों के कारोबारी भी यहां से माल खरीदकर ले जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में फसल, ईंधन या घरों को बरसात के पानी से बचाने के लिए पॉलीथिन और तिरपाल की बिक्री ज्यादा होती है।
शहरी क्षेत्रों में बरसाती (रैनकोट) का उपयोग ज्यादा किया जाता है। तिरपाल कारोबारी हर्ष जैन ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले यह कारोबार धीमा है। इस बार अच्छे मानसून की संभावना को देखते हुए माल तो मंगाया है, लेकिन बिक्री उस गति में नहीं हो रही है। रेनकोट विक्रेता प्रशांत जैन ने बताया कि इस बार अच्छी क्वालिटी और नई डिजाइनों के रेनकोट आए हैं, लेकिन अभी बहुत कम मात्रा में इन्हें सजाया जा रहा है क्योकि बिक्री कम है।
15 करोड़ से ज्यादा का कारोबार
जिले में बरसाती, पॉलीथिन और तिरपाल और पॉलीथिन का सीजन में बड़ा कारोबार होता है। बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह 10 से 15 करोड़ के बीच रहता है। क्योंकि इन सभी चीजों के करीब 25 थोक विक्रेता हैं। वहीं फुटकर में काम करने वाले कारोबारियों की तादाद भी 100 से अधिक है। यहां पर ज्यादातर माल मुंबई और दिल्ली से आता है।
यह है कीमत
तिरपाल- 150 से 8000 रुपए।
पॉलीथिन 80 से 150 रुपए किलो।
छाता 80 से 300 रुपए तक।
बरसाती 100 से 1500 तक।
लेडीज बरसाती 125 से 1800 तक।
Published on:
30 Jun 2018 09:45 am
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