
संस्कार केंद्र
नार्मदीय ब्राह्मणों को भाई संस्कारधानी, शिक्षा के बल पर लहरा रहे यशपताका
-स्वतंत्रता संग्राम से लेकर हर क्षेत्र में योगदान
जबलपुर।
निमाड़ व मालवा अंचल में नर्मदा के किनारे रहने वाले 4 नार्मदीय ब्राह्मण परिवार 1937 में जबलपुर में आकर रहने लगे। ये संस्कारधानी में स्थापित हो गए तो उस अंचल के अन्य नार्मदीय ब्राह्मण भी संस्कारधानी में आकर रहने लगे। शिक्षा, धर्म, अध्यात्म में रुचि रखने वाले नार्मदीय ब्राह्मणों को यहां की सभ्यता-संस्कृति बहुत भाई।जल्द इन्होंने यहां के निवासियों को अपना बना लिया। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर शहरहित की हर गतिविधि में नार्मदीय ब्राह्मण समाज ने योगदान दिया। अब शहर में दो सौ से अधिक नार्मदीय ब्राह्मण परिवार हैं। इन परिवारों के सदस्य अपनी शिक्षा व लगन के बल पर देश, विदेश में संस्कारधानी की यशपताका लहरा रहे हैं। बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए अब डेढ़ करोड़ रु की लागत से अत्याधुनिक संस्कार केंद्र बनवाया जा रहा है, जहां नार्मदीय ब्राह्मण समाज की धार्मिक, सामाजिक गतिविधियां होंगी।
ये पर्व मनाते हैं-
समाज नर्मदा जयंती, मकर संक्रांति, कृष्ण जन्माष्टमी,हरितालिका तीज पर्व मुख्य रूप से मनाता है। नार्मदीय ब्राह्मण समाज के लोग दत्त मन्दिर गोलबाजार में हर साल पितृपक्ष में पितरों का सामूहिक पुण्य स्मरण करते हैं। सभी मिलकर बिना भेदभाव के सामूहिक रूप से श्राद्धकर्म करते हैं। समाज सामूहिक उपनयन संस्कार का भी आयोजन करता है।संक्रांति पर महिलाएं धूंघरमास की गवर्नी मनाती हैं। रात भर व्रत रखकर भजन पूजन व सुहाग की वस्तुएं दान करती हैं। सूर्योदय के पूर्व भोजन करती हैं।
छात्रवृत्ति योजना ने दिया शिक्षा को बढ़ावा-
पारे ने बताया कि पहले समाज के लोग विष्णु सहस्रनाम व रामायण का पाठ करते थे। इस बहाने समाज के लोग मिलते थे। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए समाज ने छात्रवृत्ति योजना चलाई। इसकी वजह से शिक्षा का स्तर बढ़ा।
संस्कार केंद्र का कार्य अंतिम चरण में-
जनसंख्या बढ़ने पर समाज के आयोजनों व धार्मिक कार्यक्रमों के लिए जगह की कमी महसूस की जाने लगी। इसे देखते हुए समाज के सहयोग से सूरतलाई के पास जमीन खरीदी गई। यहां डेढ़ करोड़ रु की लागत से दो मंजिला संस्कार केंद्र का निर्माण जारी है। इसमे सभागार, ध्यान व योग केंद्र, सामाजिक भवन व अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। कार्य अंतिम चरण में है।
स्वाधीनता संग्राम में योगदान-
नार्मदीय ब्राह्मण समाज ने संस्कारधानी में जल रही स्वतंत्रता संग्राम की वेदी में अपनी आहुति दी। पारे ने बताया कि स्व मांगीलाल गुहा ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। वे जेल भी गए। 2012 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति ने सम्मानित भी किया था। न्याय के क्षेत्र में अधिवक्ता शेखर शर्मा राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता रह चुके हैं। अधिवक्ता ताराचंद बिल्लोरे, अनिल पारे का भी न्यायपालिका को अहम योगदान रहा है। चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ दिलीप साकल्ले ने नाम कमाया। वे जबलपुर मेडिकल कॉलेज के डीन रहे। एसआर चौरे हाईकोर्ट में अतिरिक्त रजिस्ट्रार व डॉ एसडी उपाध्याय एग्रीकल्चर कॉलेज के डायरेक्टर थे। शिक्षा के क्षेत्र में योगेश चन्द्र उपरीत का नाम उल्लेखनीय है। खेल के क्षेत्र में संजय बिल्लोरे ने राष्ट्रीय स्तर पर भारोत्तोलन की कई प्रतियोगिताएं जीतीं।
नौकरीपेशा हैं लोग-
मप्र हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के रीडर संजय पारे बताते हैं कि बिल्लोरे, पारे, शर्मा,जोशी व उपरीत परिवार सबसे पहले 1930-40 के दशक में यहां आए थे। बाद में इनको देखकर बड़ी संख्या में निमाड़ व मालवा अंचल के हरदा, भुआणा, खंडवा, इंदौर, ओंकारेश्वर आदि क्षेत्रों के नार्मदीय ब्राह्मणों का यहां आना शुरू हुआ। नार्मदीय ब्राह्मण समाज मुख्यतः शिक्षा, धर्म, अध्यात्म से जुड़ा है। यहां आने के बाद समाज के लोगों ने यहां की फैक्ट्रियों, रेलवे व अन्य शासकीय संस्थानों में नौकरियां करना आरम्भ कर दिया। समाज का नार्मदीय नवज्योति सन्गठन बना। 1991 में नार्मदीय ब्राह्मण समाज जबलपुर के रूप में पंजीकृत हुआ। पारे बताते हैं कि आज भी नार्मदीय ब्राह्मण समाज के अधिकांश लोग शासकीय व अन्य नौकरियों में हैं।
Published on:
13 Jul 2023 12:16 pm
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