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राजस्थान के मारवाड़ से आए व्यापारियों से गुलजार है संस्कारधानी का बाजार

संस्कारधानी की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान राजस्थान से यहां व्यापार करने आये मारवाड़ी वर्ग का माना जाता है। लगभग 5 सौ वर्ष पूर्व ये व्यापारी संस्कारधानी आए और यहां व्यापार व कृषि की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए यहीं बस गए। नगर के व्यापार व कृषि से जुड़े उद्यमों को इस समाज ने गति दी। मारवाड़ी व्यापारी धनार्जन व जनसेवा दोनो मामलों में नगरसेठ साबित हुए हैं।

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गणगौर

गणगौर

सेवा व धर्म-कर्म में अग्रणी है समाज, गौड़ ब्राह्मणों ने भी बनाया अपना अलग मुकाम
जबलपुर।

संस्कारधानी की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान राजस्थान से यहां व्यापार करने आये मारवाड़ी वर्ग का माना जाता है। लगभग 5 सौ वर्ष पूर्व ये व्यापारी संस्कारधानी आए और यहां व्यापार व कृषि की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए यहीं बस गए। नगर के व्यापार व कृषि से जुड़े उद्यमों को इस समाज ने गति दी। मारवाड़ी व्यापारी धनार्जन व जनसेवा दोनो मामलों में नगरसेठ साबित हुए हैं। शहर के सभी बड़े धार्मिक आयोजनों में सबसे बड़े सहयोगी मारवाड़ी व्यापारी ही होते हैं। यहां रहते रहते संस्कारधानी इन्हें इतनी भा गई, कि अब इनके परिवारों के बच्चे मारवाड़ी की बजाय स्थानीय बुंदेली मिश्रित खड़ी भाषा बोलने लगे हैं।

इन्होंने किया नाम रोशन-
शहर के मारवाड़ी व्यापारियों में सेठ गोकुलदास व उनके परिवार का नाम अग्रणी है। काबरा ने बताया कि सेठ गोविन्ददास, रत्नकुमारी जीजी बाई के अलावा सवाईमल जैन के नाम राजनीति के क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं। सवाईमल जैन जबलपुर के महापौर व मध्यप्रदेश की विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे। सराफा व्यवसाय में समदड़िया व भूरा परिवार ने शोहरत हासिल की। निर्मलचन्द भूरा ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे। शहर के धार्मिक व सामाजिक कार्यों में त्रिभुवन दास मालपाणी व मधुसूदन दास मालपाणी ने सदैव आगे बढ़कर योगदान दिया। कृषि उपकरण विक्रय व निर्माण में शरद काबरा, अर्थशास्त्र में प्रो मंगलचंद टांडिया के नाम प्रमुख हैं। न्याय के क्षेत्र में सुको के पूर्व जस्टिस एससी माहेश्वरी, हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश केके लाहोटी, जस्टिस यूसी माहेश्वरी, जस्टिस जेके माहेश्वरी ने परचम लहराया। पत्रकारिता में भी जबलपुर के मायाराम सुरजन व मदनलाल माहेश्वरी अग्रणी स्तम्भ रहे।

ये पर्व मनाते हैं-
गणगौर, तीज, करवा चौथ, दीपावली, होली, रक्षाबंधन, दशहरा,महेश नवमी व देवी पूजा

5 सौ वर्ष पूर्व आये थे-

मारवाड़ी व्यापारी लगभग 5 सौ वर्ष पूर्व जबलपुर आए थे। जबलपुर मारवाड़ी सम्मेलन व माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष शरद काबरा ने बताया कि उस समय करीब 50 परिवार राजस्थान से यहां आए। संस्कारधानी में व्यापार और कृषि की पृष्ठभूमि इन्हें पसन्द आ गई। शहर के सभी इलाकों में मारवाड़ी बसे हैं। बड़ा फुहारा बाजार मारवाड़ियों का ही कहलाता था। काबरा ने बताया कि धीरे धीरे औऱ मारवाड़ी व्यापारी यहां आए। यहां रह रहे मारवाड़ियों के परिवार भी बढ़े। अब शहर में लगभग मारवाड़ियों के लगभग 1000 परिवार व 5000 से अधिक जनसंख्या है।

इमारतें दिलाती हैं याद-
मारवाड़ी समाज के संस्कारधानी के प्रति योगदान का बखान यहां की ऐतिहासिक इमारतें करती हैं। गोकुलदास धर्मशाला, विक्टोरिया हॉस्पिटल, हाईकोर्ट का भवन व खंदारी जलाशय सेठ गोविन्ददास के परिवार की देन हैं। मन्नूलाल जगन्नाथ ट्रस्ट अस्पताल व नर्मदा नर्सरी स्कूल हनुमानताल के लिए मालपाणी परिवार जाना जाता है।

मेले हैं मारवाड़ी समाज की देन-
जबलपुर में मनोरंजन मेलों की शुरुआत मारवाड़ी समाज ने ही की थी। शहीद स्मारक परिसर में समाज की ओर से राजस्थान उत्सव के नाम से मनोरंजन मेला लगता था। समाज के सम्मेलन में बड़ी हस्तियों को बुलाया जाता है। काबरा ने बताया कि 2005 में समाज के सम्मेलन में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला यहां आ चुके हैं।
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सामाजिक सरोकारों में अग्रणी हैं राजस्थानी गौड़ ब्राह्मण
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जबलपुर। व्यवसायिक दृष्टिकोण के धनी मारवाड़ी समाज के विप्रजनों का भी जबलपुर में करीब एक शताब्दी पूर्व आगमन होना आरंभ हो गया था। गौड़ ब्राह्मण के नाम से प्रसिद्ध यह विप्रसमाज मूलत: राजस्थान, हरियाणा और पश्चिमी उत्तरप्रदेश से जबलपुर पहुंचा। समाज के बुजर्गुजन बताते हैं कि पेशे से राजवैद्य और पुरोहित गौड़ ब्राह्मणों में विद्वतजनों का भंडार था। मारवाड़ी व्यापारियों के आमंत्रण और राजस्थान में पड़े सूखे के बाद गौड़ ब्राह्मणों का जबलपुर आना शुरू हुआ। आज गौड़, आदिगौड़, गूजर गौड़, श्री गौड़ और मालव गौड़ के करीब 135 परिवार यहां निवास कर रहे हैं। सभी समुन्नत हैं। साफ्टवेयर इंजीनियर से लेकर डॉक्टर, वैद्य, सीए, व्यापार, पत्रकारिता, आर्चायत्व में इनका काफी दखल है। कई बच्चे देश के विभिन्न प्रांतों सहित विदेशों में अनेक क्षेत्रों में सेवारत हैं। समाज के लोगों का आज भी अपने परिवारों के विभिन्न कार्यक्रमों में राजस्थान, हरियाणा आना-जाना जारी है। वर्तमान में डॉ आरडी शर्मा, पंडित नखलेश उपाध्याय, डॉ गिरीश पचौरी के संरक्षण और डॉ. आरके चतुर्वेदी के संयोजन में समाज प्रगतिरत है। सभा के वर्तमान अध्यक्ष रवींद्र शर्मा और मंत्री प्रसिद्ध राजवैद्य डॉ. राजेश शर्मा के मार्गदर्शन में महिला मण्डल के विशेष सहयोग और युवा वर्ग के प्रयासों से यहां साल भर तीज-त्योहारों पर विविध आयोजन, किए जा रहे हैं।