
shani amavasya - puja vidhi aur mahatva
जबलपुर। 11 अगस्त को शनि अमावस्या है। शनिवार के दिन आनेवाली अमावस्या को शनैश्चरी अमावस्या या शनि अमावस्या कहा जाता है। शनि अमावस्या के दिन शनि पूजन का विशेष महत्व है। अमावस्या के दिन तो वैसे भी शनि देव और शिवजी की पूजा फलदायक मानी जाती है पर शनि अमावस्या का यह संयोग ज्यादा शुभफलदायक हो गया है। इसलिए इस दिन शनि देव की विधि विधान से पूजा जरूर करना चाहिए। शनि के कोप और शनि दोष से मुक्ति के लिए यह दिन बहुत महत्व का बन गया है।
इस साल की आखिरी शनि अमावस्या
विशेष बात यह भी है कि इस साल अब शनि अमावस्या नहीं पड़ेगी। 11 अगस्त 2018 को पडऩेवाली शनि अमावस्या साल की आखिरी शनि अमावस्या है इसलिए यह मौका चूकना नहीं चाहिए। इस दिन शनि मंदिर में जाकर शनि देव को तिल अर्पित करें, काला झंडा चढ़ाएं और तैल चढ़ाएं। साथ ही शनि देव की शांति के लिए शमी का पौधा लगाना चाहिए। इसके अलावा पीपल की पूजा भी करनी चाहिए। शनिदेव की पूजा करने के बाद शनि मंत्र का जाप भी जरूर करें। शनि के सरल मंत्र - ऊं शं शनिश्चराएै नम: या तांत्रिक मंत्र ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराएै नम: का ज्यादा से ज्यादा जाप करें। कम से कम एक माला जाप करें और अधिकतम जितने कर सकें उतना ज्यादा फल मिलेगा यह तय है। शनि अमावस्या के दिन शनिदेव की मनोयोग से पूजा और मंत्रजाप से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। उनकी कृपा से दुख-दारिद्रय मिटते हैं और सुख=समृद्धि प्राप्त होती है।
इन राशिवालों को मिलेगा फायदा
शनि की शांति के उपाय उन लोगों को भी करना चाहिए जिनपर शनि की साढ़े साती चल रही है। वृश्चिक, धनु और मकर राशि के लोग साढ़ेसाती से पीडि़त हैं। इन राशि वालों के लिए शनि की शांति का स्वर्णिम मौका मिला है। इस दिन शमी के पौधे की पूजा करने से लाभ मिलेगा। साढ़े साती से पीडि़त जातक दशरथकृत शनि स्तोत्र का ज्यादा से ज्यादा जाप करें।
Published on:
10 Aug 2018 03:12 pm
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