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जबलपुर. नर्मदा तट पर एक जगह ऐसी भी है, जहां माता नर्मदा के साथ शनिदेव की अधिक पूजा होती है। भेड़ाघाट के समीप नर्मदा के दक्षिणी तट पर स्थित शनिकुंड में शनिदेव की कृपा पाने के लिए भक्तों की बड़ी संख्या हरदिन पहुंचती है। पौराणिक मान्यतानुसार यहां शनिदेव ने तपस्या की थी। शुक्रवार को यहां भक्तों का तांता लगेगा।
नर्मदा जल का बदल जाता है रंग, पूजा कर वस्त्र छोड़ देतेे हैं लोग
नौ ग्रहों के कुंड हैं
लम्हेटाघाट के समीप 9 अलग-अलग कुंड हैं। इनके पानी के रंग भी अलग-अलग नजर आते हैं। पुरोहित जनार्दन शुक्ला बताते हैं कि स्कन्दपुराण व नर्मदा पुराण में उल्लेख है कि सतयुग में सभी देवी देवताओं ने नर्मदा किनारे शनि देव ने यहां तपस्या की थी। उसी समय नवग्रहों के साथ शनिदेव ने भी यहां तपस्या की थी। फलस्वरूप यह कुंड निर्मित हुआ था। यहां स्नान व दान से शनि दोष व महादशा का प्रभाव कम हो जाता है।
शनिदेव प्रकटोत्सव आज, मंदिरों में उमड़ेंगे श्रद्धालु
ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि पर शुक्रवार को वट सावित्री व्रत, शनि प्रकटोत्सव और शोभन योग एक साथ पड़ रहे हैं। ज्योतिष के अनुसार इस बार यह तिथि महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर नर्मदा में डुबकी लगाने के लिए तटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। शनि मंदिरों में भक्तों की कतारें लगेंगी। शनि मंदिरों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।
श्री लालबाबा मंदिर
स्वयं सिद्ध श्री लाल बाबा मंदिर धनवंतरि नगर में शुक्रवार को शनि अमावश्या पर सायं 6 बजे भगवान शनिदेव की महाआरती कर प्रसाद का वितरण किया जाएगा। आयोजक मंडल के गोपाल पटेल, राहुल चोबे, रामनारायण गुप्ता, खुशीराम पटेल आदि ने श्रद्धालुओं से महाआरती में पहुंचकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।
समीप के पानी के रंग से अंतर
शनिकुंड के आसपास नर्मदा नदी का जल साफ और पारदर्शी सफेद रंग का है, लेकिन शनिकुंड में जल का रंग कालिमा लिए हुए हैं। यह जल न तो ठहरा हुआ है और ना ही अशुद्ध है स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि शनिदेव के श्याम वर्ण की वजह से यहां का पानी काला नजर आता है। यहां शनिवार के दिन बड़ी संख्या में भक्त आते हैं। जन्मोत्सव पर मेला सा लगता है।
Published on:
19 May 2023 11:30 am
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