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इस महायज्ञ से मिलती हैं अपार शक्तियां, दुश्मन आंख उठाकर भी नहीं देख सकता

इस महायज्ञ से मिलती हैं अपार शक्तियां, दुश्मन आंख उठाकर भी नहीं देख सकता

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shat chandi yagya benefits chandi path benefits in hindi

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जबलपुर। भगवान को निर्मल मन से भक्ति करने वाले भक्त बहुत ही प्रिय होते हैं। छल और कपट करने वालों को परमात्मा की कृपा नहीं मिलती है। इस संसार में परमात्मा की शरण ही सच्ची शरण है। उक्ताशय के उद्गार शिवनगर राजराजेश्वरी दुर्गा मंदिर दरबार में आयोजित श्री शिवशक्ति शतचंडी महारूद्र महायज्ञ के अवसर पर आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह के अवसर पर कथा व्यास आचार्य लखन कृष्ण शास्त्री ने व्यक्त किए।

news facts-

जगह-जगह बह रही धर्म सरिता
शिवनगर में शतचंडी महारुद्र महायज्ञ, गढ़ा में श्रीमद्भागवत
निर्मल मन से ही प्राप्त होते हैं परमात्मा
उन्होंने कहा कि इस संसार में जो भी होता है वह परमात्मा की शरण से ही होता है। कथा में उन्होंने भक्ति ज्ञान और वैराग्य के प्रसंग का बड़ा ही मनोहारी वर्णन किया। शास्त्री ने कहा कि भगवान की भक्ति मोह के वशीभूत होकर नहीं करना चाहिए। साधना के पथ पर कठिनाईयां आती हैं परंतु जो भी साधक भक्ति के पथ पर जाते हैं उनके जीवन की सभी कठिनाईयां दूर होती है। कथा के पूर्व व्यासपीठ का पूजन नारायण प्रसाद मिश्रा, कुलदेव मिश्रा, डीके तिवारी, वीरेन्द्र मिश्रा, निरपत चौधरी आदि ने किया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

क्या है शतचंडी का महत्त्व -
माँ दुर्गा को शक्ति की देवी कहा जाता है। श्री दुर्गाजीका एक नाम ‘चंडी’ भी है। मार्कंडेय पुराणमें इसी देवीचंडीका माहात्म्य बताया है । उसमें देवीके विविध रूपों एवं पराक्रमोंका विस्तारसे वर्णन किया गया है । इसमेंसे सात सौ श्लोक एकत्रित कर देवी उपासनाके लिए `श्री दुर्गा सप्तशती’ नामक ग्रंथ बनाया गया है । सुख, लाभ, जय इत्यादि कामनाओंकी पूर्तिके लिए सप्तशतीपाठ करनेका महत्त्व बताया गया है ।

दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है उसे चंडी यज्ञ बोला जाता है। शतचंडी यज्ञ को सनातन धर्म में बेहद शक्तिशाली वर्णित किया गया है। इस यज्ञ से बिगड़े हुए ग्रहों की स्थिति को सही किया जा सकता है और सौभाग्य इस विधि के बाद आपका साथ देने लगता है। इस यज्ञ के बाद मनुष्य खुद को एक आनंदित वातावरण में महसूस कर सकता है। वेदों में इसकी महिमा के बारे में यहाँ तक बोला है कि शतचंडी यज्ञ के बाद आपके दुश्मन आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं। इस यज्ञ को गणेशजी, भगवान शिव, नव ग्रह, और नव दुर्गा (देवी) को समर्पित करने से मनुष्य जीवन धन्य होता है।