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shiv abhishek mantra in hindi- शिव अभिषेक के लिए ये हैं लाभकारी मंत्र

सावन के महीने में करें जाप

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Balmeek Pandey

Jul 06, 2017

shiv abhishek mantra

shiv abhishek mantra

जबलपुर। शिव में समायी है यह सारी दुनिया। जगत के कण-कण का अस्तित्व महादेव से ही है। ऐसे भगवान भोलेनाथ की अराधना का पर्व याने की सावन की महीना 10 जुलाई से शुरु होने जा रहा है। इस माह में महादेव हर रूप में भक्तों का कल्याण करते हैं। फिर चाहे महादेव की प्रतिमा की पूजा हो या फिर लिंग रूप की आराधना। पुराणों के अनुसार सावन में महादेव को प्रसन्न करने का रामबाण उपाय है रुद्राभिषेक। जानकारों की मानें तो सही समय पर रुद्राभिषेक करके आप शिव से मनचाहा वरदान पा सकते हैं। क्योंकि शिव के रुद्र रूप को बहुत प्रिय है अभिषेक। तो आइए जानते हैं रुद्राभिषेक के लिए लाभकारी मंत्र।

ऐसे करें अभिषेक
सावन के महीने में भगवान शिव के शिवलिंग रूप का अभिषेक करें। पंचाक्षरी मंत्र के साथ दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, पंचामृत, इत्र, फलों के रस, गंगाजल के बाद शुद्ध जल से अभिषेक कराएं। चने की दाल, सरसों तेल, काले तिल, आदि कई सामग्रियों से महादेव का अभिषेक करें। इसके बाद फूल, दूर्वा, बिल्वपत्र, आकपुष्प, धतूरा, कनेल आदि चढ़ाएं। अभ्रक, भांग आदि अर्पित करने के बाद नैवेद्य, फलों से भाग लगाएं। श्रीफल भेंट करने के बाद धूप-दीप से आरती करें। अभिषेक के दौरान पूजन विधि के साथ-साथ मंत्रों का जाप भी बेहद आवश्यक माना गया है। अभिषेक मंत्र न बने तो फिर महामृत्युंजय मंत्र का जाप हो, गायत्री मंत्र हो या शिव भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र का जाप करें।

महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

रुद्राभिषेक की महिमा
भगवान शिव बड़े ही सरल और सहज हैं। उनका आशीर्वाद भक्त को क्षण मात्र की भक्ति से प्राप्त हो जाता है। भगवान भोलेनाथ को रुद्राभिषेक सबसे ज्यादा प्रिय है। पुराणों में वर्णन आता है कि रुद्राभिषेक से शिवजी को प्रसन्न करके आप असंभव को भी संभव बना सकते हैं। अपने भविष्य को शिव स्त्रोत्र के जाप से संवार सकते हैं।

मनोवांछित फल पाने के लिए
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥
मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय
मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:॥
शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय
श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:॥
अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्।
अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।

निरोगी जीवन के लिए
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।
भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ।।
कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय।
सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे।।

इसका करें पाठ
नमामिशमीशान निर्वाण रूपं। विभुं व्यापकं ब्रम्ह्वेद स्वरूपं।।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाश माकाश वासं भजेयम।।
निराकार मोंकार मूलं तुरीयं। गिराज्ञान गोतीत मीशं गिरीशं।।
करालं महाकाल कालं कृपालं। गुणागार संसार पारं नतोहं।।
तुषाराद्रि संकाश गौरं गम्भीरं। मनोभूति कोटि प्रभा श्री शरीरं।।
स्फुरंमौली कल्लो लीनिचार गंगा। लसद्भाल बालेन्दु कंठे भुजंगा।।
चलत्कुण्डलं भू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननम नीलकंठं दयालं।।
म्रिगाधीश चर्माम्बरम मुंडमालं। प्रियम कंकरम सर्व नाथं भजामि।।
प्रचंद्म प्रकिष्ट्म प्रगल्भम परेशं। अखंडम अजम भानु कोटि प्रकाशम।।
त्रयः शूल निर्मूलनम शूलपाणीम। भजेयम भवानी पतिम भावगम्यं।।
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी। सदा सज्ज्नानंद दाता पुरारी।।
चिदानंद संदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।
न यावत उमानाथ पादार विन्दम। भजंतीह लोके परे वा नाराणं।।
न तावत सुखं शान्ति संताप नाशं। प्रभो पाहि आपन्न मामीश शम्भो ।

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