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ट्रॉपिकल लैंड में उगाई स्ट्रॉबेरी

खोज रहे भविष्य की संभावनाएं कृषि विज्ञान केंद्र ने किया प्रयोग, पौधों फूलों के साथ उंगे फल

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जबलपुर. स्ट्राबेरी की खेती की संभावनाओं को शहर में तलाशने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किया जा रहा प्रयास रंग लाया है। स्ट्राबेरी के खेती का तैयार किया गए मॉडल में जहां पौधे लगे तो वहीं उनमें फ्रूटिंग भी हुई है। कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से यह पहला प्रायोगिक प्रयोग किया गया था जो काफी हद तक सफल रहा है। फिलहाल यह एक सीमित जगह पर था। अब कृषि वैज्ञानिक इसे लेकर भविष्य की संभावनाओं को भी खोज रहे हैं कि ताकि पौधे में अधिक से अधिक फल कैसे लिए जा सकें।
इस तरह से की गई तैयारी
मॉडल को तैयार करने में विशेष रूप से तैयारी की गई। खेती की मिट्टी को बारीक करने के साथ ही गोबर खाद्य, जैविक उर्वरक का उपयोग कर क्यारियां बनाई गई। इसे जमीन से करीब 12 से 15 सेंटीमीटर उपर बनाया गया। क्यारियों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी रखी गई। पानी के लिए डि्प एरिगेशन सिस्टम तैयार किया गया।
पौधों में आए फूल और फल
स्ट्राबेरी की खेती के लिए कृषि केंद्र में क्यारियों और पॉलीथिन के प्रयोग से इसका मॉडल तैयार किया गया था। इसमें करीब दौ सौ पाधे लगाए गए थे। मार्च में इन पौधों पर पत्तियों के साथ ही फूल भी खिले और पाधों में अच्छी फ्रूटिंग भी हुई। बड़ी संख्या में चटक लाल रंग की स्ट्रेबेरी निकली।
-स्ट्राबेरी की संभावनाओं को लेकर पहला प्रयास किया था जो आशा से बेहतर सामने आया है। हम पौधों की फ्रूटिंग बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। अभी इसमें लगातार काम किया जा रहा है।
-डॉ.डीपी शर्मा, डॉयरेक्टर एक्सटेंशन एंड सर्विस