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डीएड कॉलेजों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा ये सवाल, शिक्षा मंडल से मांगा जवाब

सर्वोच्च न्यायालय ने डीएड कॉलेज संचालन करने वाली संस्था मिलेनियम एजुकेशन सोसायटी व अन्य की याचिका पर मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल से जवाब-तलब किया है

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Supreme Court Big Decision

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जबलपुर । सर्वोच्च न्यायालय ने भोपाल में डीएड कॉलेज संचालन करने वाली संस्था मिलेनियम एजुकेशन सोसायटी व अन्य की याचिका पर मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल से जवाब-तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि जब 13 अन्य कॉलेजों को समान परिस्थितियों में संबद्धता दे दी गई, तो उनकी संस्थाओं को क्यों नहीं दी गई। एक सप्ताह में सरकार से जवाब मांगा गया है।


यह है मामला

सोसायटी की ओर से हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि 2008 में उनकी संस्था को माशिमं ने 50 डीएड सीटों की संबंद्धता दी थी। यह गत वर्ष तक जारी रही। सत्र 2018-19 के लिए नवीनीकरण के लिए संस्था ने पांच अप्रैल 2018 को आवेदन दिया। लेकिन, कट ऑफ डेट 10 मार्च होने के कारण इसे खारिज कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि स्वयं एनसीटीई ने मान्यता प्राप्त कॉलेजों की सूची ही 20 मार्च को जारी की। उन्होंने तर्क दिया कि इसी तरह 13 अन्य संस्थाओं ने विलंब से आवेदन दिया, लेकिन उनके नाम संबद्धता सूची में हैं। गत 18 मई को हाईकोर्ट ने इस आधार पर याचिका को नामंजूर कर दिया था कि याचिकाकर्ता की ओर से इन 13 कॉलेजों के नाम नहीं बताए गए। हाईकोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।


क्लेम का भुगतान छह फीसदी ब्याज सहित करें
जिला उपभोक्ता फोरम ने निजी बीमा कंपनी इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिए हैं कि वे वाहन दुर्घटना में मृतक के परिजन को एक्सीडेंट पॉलिसी के क्लेम का भुगतान छह फीसदी ब्याज सहित करें। फोरम की पीठासीन सदस्य सुषमा पटेल व सदस्य एसएन खरे की कोर्ट ने परिवाद का निराकरण करते हुए कंपनी को दो माह के अंदर आदेश का पालन करने को कहा है।
बेलबाग निवासी विमला विश्वकर्मा ने परिवाद दायर कर कहा था कि उसके पति राजेंद्र विश्वकर्मा ने जून 2007 से जून 2008 तक उक्त कंपनी ने दो लाख रुपए का एक्सीडेंट बीमा लिया था। 24 जनवरी 2008 को कटनी रोड पर कार एक्सीडेंट में राजेंद्र की मौत हो गई। बीमा के क्लेम के लिए परिवादी की ओर से कई बार आवेदन दिया गया।