
The administration made its claim on the land of the Burn Company
जबलपुर। सिविल लाइन में बर्न कम्पनी से वापस ली गई एक अरब 72 करोड़ रुपए की शासकीय जमीन पर रेलवे के दावे के बाद प्रशासन ने अपना बोर्ड लगा दिया है। शनिवार को रांझी तहसील के कर्मचारियों ने पुराने आरटीओ भवन के पास बोर्ड लगाया। इसमें उल्लेख किया गया है कि यह जमीन मध्यप्रदेश शासन की है। इससे पहले पश्चिम मध्य रेल प्रबंधन ने भी यहां पिलर्स लगाए थे।
रांझी तहसील के अंतर्गत ब्लॉक नम्बर 23, प्लॉट नम्बर 1 व 2 की इस 9 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण थे। इस जमीन को लेकर शासन और समदडिय़ा ग्रुप के बीच कानूनी विवाद चल रहा था। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सर्वोच्च न्यायालय ने शासन के पक्ष में फैसला दिया है। ऐसे में ब्रिटिश काल की बर्न कम्पनी की यह भूमि शासन मद में आ गई थी। 20 मई को यहां से कब्जा हटाने का काम प्रारम्भ हुआ।
इसमें 118 साल पुराना बर्न कम्पनी के मैनेजर का बंगला, बर्न कोर्ट के अलावा चार अधिकारियों के बंगले भी शामिल थे। कुछ समय पहले रेलवे ने यहां पिलर्स लगाकर बेशकीमती जमीन पर अपना दावा किया था। इस सम्बंध में प्रशासन ने रेलवे से चर्चा करने की बात कही थी। प्रशासन की ओर से शनिवार को इस जमीन पर बोर्ड लगवाकर लिखवाया गया कि यह जमीन प्रदेश शासन की है।
अभी भी जमे हैं कब्जे
शासन की बेशकीमती जमीन से बंगले हटाने के बाद भी 19 मकान बने हुए हैं। इन्हें भी हटाया जाएगा। बारिश और निर्वाचन की प्रक्रिया के कारण कार्रवाई रोक दी गई थी। जल्द ही अतिक्रमणों को हटाया जाएगा।
जमीन की होगी नीलामी
प्रदेश शासन लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग के माध्यम से बेशकीमती जमीन को नीलाम करेगा। इससे मिलने वाली राशि से सरकारी भवनों का निर्माण और उन्नयन कराया जाएगा। इसकी डीपीआर भी जिला प्रशासन तैयार करा रहा है।
सिविल लाइन स्थित पुराने आरटीओ के पास की जमीन मध्यप्रदेश शासन की है। इसमें किसी प्रकार का विवाद नहीं है। पूर्व में यहां से अतिक्रमण हटाए गए थे। बारिश के बाद अन्य अतिक्रमणों को भी हटाया जाएगा।
श्यामनंदन देले, तहसीलदार, रांझी
Published on:
24 Jul 2022 06:35 pm

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