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चालान पेश होते ही जारी गिरफ्तारी वारंट को हाईकोर्ट ने निरस्त किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चालान पेश होते ही आरोपी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी गैर जमानती वारंट को निरस्त कर दिया।

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जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चालान पेश होते ही आरोपी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी गैर जमानती वारंट को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने इसे गैरकानूनी कहते हुए कहा कि पहली बार आरोपी को उपस्थित होने के लिए समन जारी किया जाना चाहिए। अगर वह अनुपस्थित रहता है तो आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।

मामले के तथ्य के अनुसार पॉक्सो एक्ट के एक मामले में अभियुक्त की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ट्रायल कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता द्वारा पेश याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की पीठ ने कहा कि चार्जशीट दाखिल करने की पहली तारीख को गैर जमानती वारंट जारी करना कानून की स्थापित स्थिति के खिलाफ है। कानून की यह स्थापित स्थिति है कि किसी व्यक्ति को अदालत में लाने के लिए गैर-जमानती वारंट तभी जारी किया जाना चाहिए, जब समन या जमानती वारंट का वांछित परिणाम होने की संभावना न हो क्योंकि गैर जमानती वारंट जारी करने से व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप होता है। इसलिए, गैर जमानती वारंट जारी करने से पहले अदालतों को बेहद सावधान रहना होगा। वारंट या तो जमानती या गैर जमानती तथ्यों की उचित जांच और दिमाग के पूर्ण आवेदन के बाद ही जारी किए जा सकते हैं, क्योंकि इसमें बेहद गंभीर परिणाम शामिल हैं। पीठ ने यह भी कहा कि अभियुक्त जानबूझकर समन से बच रहा है, तो न्यायालय जमानती वारंट जारी कर सकता है। और यदि जमानती वारंट ने भी वांछित परिणाम नहीं दिया है, तो यदि न्यायालय पूरी तरह से संतुष्ट है कि अभियुक्त जानबूझकर अदालती कार्यवाही से बच रहा है तो गैर जमानती वारंट जारी करने की प्रक्रिया का सहारा लिया जाए।