
There are no regular principals in 83 colleges of Jabalpur division
जबलपुर। जबलपुर संभाग के 86 कॉलेजों में से 83 में नियमित प्राचार्य नहीं हैं। इससे इनका संचालन अतिथि विद्वानों के भरोसे हो रहा है। कॉलेजों में स्थाई प्राचार्य नहीं होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वित्तीय कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। आलम यह है कि प्रभारी प्राचार्य न तो कोई बड़ा निर्णय ले पाते हैं और न ही प्राध्यापकों पर जवाबदेही तय कर पाते हैं।
शहर के कॉलेज को भी नहीं मिल रहे स्थाई प्राचार्य
शासकीय महाकोशल कॉलेज लंबे समय से प्रभारी प्राचार्य के जिम्मे है। शासकीय होमसाइंस कॉलेज, मानकुंवर बाई कॉलेज में एक-एक साल के लिए अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा प्राचार्य के पद पर रहीं। इसके बाद लम्बे समय से कॉलेज को स्थायी प्राचार्य नहीं मिला। मानकुंवर बाई कॉलेज में एक साल में तीन प्रभारी प्राचार्य बदले गए। जिले के रांझी, बरेला, मझौली, पाटन कॉलेज में भी 12 साल से प्राचार्य का पद रिक्त है। जबलपुर संभाग में 86 सरकारी कॉलेज हैं। इनमें से केवल तीन कॉलेजों शासकीय ऑटोनोमस साइंस कॉलेज, सिहोरा के शासकीय विष्णुदत्त कॉलेज ङ्क्षछदवाड़ा के पीडी कॉलेज में ही स्थाई प्राचार्य हैं।
शैक्षणिक गुणवत्ता हो रही प्रभावित
शिक्षाविदों के अनुसार कॉलेजों में नियमित प्रचार्य नहीं होने से शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। प्रभारी प्राचार्यों के पास कार्रवाई के सीमित अधिकार होने, नियमों से अनिभज्ञ होने के कारण वे बड़े निर्णय लेने से बचते हैं। कई बार लापरवाह प्राध्यापकों के खिलाफ कड़ा एक्शन नहीं ले पाते। कॉलेजों पर बढ़ते काम के बोझ के कारण कई वरिष्ठ प्राध्यापक प्राचार्य की जिम्मेदारी लेने से बचते हैं। ऐसे में जूनियर प्राध्यापक को प्राचार्य का प्रभार सौंपना पड़ता है। नियमित प्राचार्य की कमी से छात्र-छात्राएं अपनी समस्याएं लेकर प्रभारी प्राचार्यों के पास जाते हैं। समस्याओं का समाधान नहीं होने पर उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ता है। कॉलेजों में खेलकूद व अन्य गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
यह सही है कि अधिकांश कॉलेजों में स्थायी प्रचार्य नहीं हैं। इसकी जानकारी उच्च शिक्षा विभाग को दी गई है। प्राचार्य की पदस्थापना का निर्णय विभाग को लेना है।
डॉ. लीला भलावी, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा
Published on:
24 Dec 2022 06:59 pm

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