
there is Anganwadi center building here but no electricity
जबलपुर. मझौली. तीन से छह साल की उम्र के बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा की पूर्ति के लिए खोले गए आंगनबाड़ी केंद्र शोपीस बन के रह गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली की व्यवस्था नहीं है। जिन आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली है, तो वहां पंखों की व्यवस्था नहीं है। केंद्रों में व्यवस्थाओं के अभाव के चलते अभिभावक अपने बच्चों को नहीं भेज रहे हैं। आलम यह है कि 40 से 60 बच्चों की दर्ज संख्या वाले आंगनबाड़ी केंद्र खाली पड़े रहते हैं। पत्रिका ने मझौली ब्लॉक के आंगनबाड़ी केंद्रों का जायजा लिया तो यह हकीकत सामने आई।
आंगनबाड़ी केंद्र सुनवानी
गांव के अंदर बने आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की दर्ज संख्या 36 थी, लेकिन केंद्र में एक बच्चा भी मौजूद नहीं था। 10 बाई 10 के एक कमरे में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित तो था, लेकिन यहां बिजली की व्यवस्था नहीं थी। केंद्र की कार्यकर्ता किरण राजपूत का कहना था कि बच्चे गर्मी केकारण आते नहीं हैं।
आंगनबाड़ी केंद्र जुझारी उमरिया
यहां की स्थिति और भी उलट थी। कार्यकर्ता दुर्गा कोल आंगनबाड़ी केंद्र के बाहर बैठी हुई थीं। उन्होंने बताया कि आज आंगनबाड़ी केंद्र में कोई भी बच्चा नहीं पहुंचा है। उनका कहना था कि आंगनबाड़ी केंद्र पक्का तो बन गया है, लेकिन बिजली की व्यवस्था नहीं की गई है। गर्मी के कारण बच्चों के साथ ही उन्हें भी परेशानी होती है। केंद्र में 40 बच्चे दर्ज हैं।
ग्राम पंचायतों द्वारा जो भी नए आंगनबाड़ी केंद्र बनाए गए हैं, वहां बिजली की व्यवस्था नहीं कराई गई हैं। बिजली की व्यवस्था कराने के लिए ग्राम पंचायत को आवेदन दिया गया है।
राखी सैयाम, परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, मझौली
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Published on:
13 Oct 2019 07:01 pm
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