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हेलमेट पर हो सकता है बड़ा फैसला, हाईकोर्ट में जवाब देने जाएंगे परिवहन आयुक्त

हेलमेट पर हो सकता है बड़ा फैसला, हाईकोर्ट में जवाब देने जाएंगे परिवहन आयुक्त  

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helmet case.

helmet case.

जबलपुर. हलफनामा देने के बाद भी छह महीने में आदेश का पालन नहीं करने को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने परिवहन आयुक्त को 24 घंटे में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश जारी किए हैं। युगलपीठ ने कहा है कि उपस्थित नहीं होने की स्थिति में उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जाएगा। हाईकोर्ट ने प्रदेश के परिवहन आयुक्त को निर्देश दिए कि वे खुद आकर बताएं कि मोटर वीकल अधिनियम के प्रावधानों का जनता से पालन सुनिश्चित क्यों नहीं हो रहा है। याचिका पर अगली सुनवाई 17 जनवरी को होगी।

मोटर व्हीकल एक्ट का मामला
सरकार ने मांगे छह महीने, अब अतिरिक्त समय देने से इंकार
आज खुद हाई कोर्ट में देना होगा जवाब
हलफनामा देकर भी आदेश का नहीं किया पालन, परिवहन आयुक्त तलब

कोर्ट पहले भी जता चुकी है नाराजगी
पूर्व में सुनवाई में सरकार की तरफ से चालानी कार्रवाई का डेटा पेश किया। युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त कर कहा था कि सड़क पर हेलमेट लगाकर वाहन चलाते नजर नहीं आते हैं। कागजी नहीं बल्कि मैदानी कार्रवाई करनी चाहिए। मोटर व्हीकल एक्ट का परिपालन निश्चित तौर पर किया जाना चाहिए। युगल पीठ ने सरकार पर 25 हजार रुपए की कॉस्ट लगाई। जुलाई में शासन ने अंडरटेकिंग दी थी कि 6 माह में हर वाहन में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लग जाएंगी। हर दोपहिया चालक के सिर पर हेलमेट होगा, कार चालक सीट बेल्ट पहनेगा। 15 जनवरी 2024 के बाद नियमों का उल्लंघन मिला तो परिवहन आयुक्त और एडीशनल आईजी अवमानना की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार होंगे। इस मामले में राज्य शासन की ओर से पालन प्रतिवेदन पेश किया और पूर्ण पालन के लिए अतिरिक्त मोहलत मांगी गई, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।

यह है मामला
हाईकोर्ट में विधि छात्रा ऐश्वर्या शांडिल्य की याचिका पर सुनवाई चल रही है। सड़क दुर्घटना में दो की मौत का हवाला देकर ग्वालियर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। चीफ जस्टिस के निर्देश पर केस मुख्य पीठ में स्थानांतरित किया। इसमें कहा था कि दुर्घटना के समय दो पहिया वाहन चालक हेलमेट लगाए होते तो उनकी मौत नहीं होती। मोटर व्हीकल एक्ट में भी हेलमेट लगाकर वाहन चलाने का प्रावधान है। वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना भी आवश्यक है। इनका प्रदेश में पालन नहीं किया जाता है।

पीठ ने पूछा, हाजिर कराएंगे या वारंट जारी करें

बेंच ने अतिरिक्त महाधिवक्ता से पूछा कि वे परिवहन आयुक्त को खुद पेश कराएंगे या वारंट जारी करें। इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बुधवार को परिवहन आयुक्त को हाजिर करने का आश्वासन दिया। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए युगलपीठ से समय प्रदान करने का आग्रह किया, जिस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए आदेश जारी किए।