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सुनने-बोलने लगे 27 मूक-बधिर बच्चे, 11 की बंधी आस

मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना से कांक्लियर इम्प्लांट सर्जरी का लाभ

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neeraj mishra

Jan 05, 2017

deaf-mute children

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जबलपुर। जन्मजात मूक-बधिर 27 बच्चों की सुनने व बोलने की क्षमता का विकास होने की जानकारी मिलते ही उनके परिजनों के चेहरे पर खुशी छा गई। 1 जनवरी 2015 से जून 2016 तक कांक्लियर इम्प्लांट सर्जरी से लाभान्वित हुए इन बच्चों का क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य कार्यालय में परीक्षण किया गया। वहीं अब 11 मूक बधिक बच्चों का मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के लिए चिन्हित किया गया है। बुधवार को डॉ. केसी गुप्ता, डॉ. कविता सचदेवा, डॉ. रुमिता आचार्य ने बच्चों का परीक्षण किया।

सिखाएंगे बोलना

क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य डॉ. रंजना गुप्ता ने बताया मेडिकल अस्पताल की डॉ. सचदेवा ने लाभांवित 27 बच्चों के परिजनों को स्पीच थैरेपी पर जोर देने सलाह दी है। असमर्थ परिजनों के बच्चों को मेडिकल में बोलना सिखाया जाएगा। डॉ. गुप्ता ने बताया कि कांक्लियर इम्प्लांट सर्जरी के लिए सरकार साढ़े 6 लाख रुपए की सहायता देती है।

मिलेगा लाभ

केस- 1 बालाघाट निवासी साढ़े चार वर्ष की बालिका की बोली सुनने के लिए परिजन के कान तरस गए हैं। पिता राजमिस्त्री हैं और डॉक्टरों ने कांक्लियर सर्जरी में लगभग 7 लाख का खर्च बताया है। योजना का लाभ मिलने से आशान्वित हो गए हैं।

राहत की सांस

केस- 2 डेढ़ वर्ष का बालक बोल नहीं पाता। सुनाई भी नहीं देता। पिता घर में आटा चक्की चलाते हैं। उन्हें निजी अस्पताल में ऑपरेशन का खर्च साढ़े 6 लाख रुपए बताया गया है। योजना में चुने जाने पर उन्होंने राहत की सांस ली है।

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