
लेडी एडवोकेट के परिवाद पर उपभोक्ता फोरम ने दिया फैसला
जबलपुर। दिए गए नाप के हिसाब से ब्लाउज व अन्य कपड़े नहीं सिलने वाले लेडीज टेलर पर चार साल बाद ऐसी गाज गिरी कि मामला चर्चा का विषय बन गया। दरअसल टेलर को एक महिला अधिवक्ता ने कपड़े सिलने के लिए दिए थे, लेकिन टेलर ने उन्हें नाप के अनुरूप नहीं सिला। महिला अधिवक्ता की शिकायत पर उसने भूल को सुधारने का प्रयास भी नहीं किया। अंतत: महिला अधिवक्ता ने उसे सबक सिखा ही दिया। महिला अधिवक्ता के परिवाद पर निर्णय देते हुए उपभोक्ता फोरम ने अब टेलर पर कड़ा जुर्माना लगाया है।
दावा पाया उचित
बताया गया है कि कपड़ों की सिलाई नहीं होने पर पीडि़त महिला अधिवक्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम की शरण ली थी। फोरम ने भी पाया कि महिला अधिवक्ता का दावा उचित है। फोरम अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव, सदस्य एसएन खरे व सुषमा पटेल की कोर्ट ने टेलर को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में कमी का दोषी पाया। कोर्ट ने टेलर को आदेश दिए कि वह पीडि़त उपभोक्ता को आठ प्रतिशत ब्याज के साथ सिलाई 1500 लौटाए। साथ ही दो माह में 3500 रुपए हर्जाना अदा करे।
ये है मामला
जयंती कॉम्प्लेक्स सिविक सेंटर निवासी अधिवक्ता अंजली पारे ने उपभोक्ता फोरम मेंं परिवाद दायर कर कहा कि उन्होंने जून 2014 में तिलक भूमि तलैया स्थित अरविंद सेंटर में कपड़े सिलने के लिए दिए थे। इनकी सिलाई 1500 रुपए चुकाई। लेकिन, जब उन्हें कपड़े मिले, तो वे फिट नहीं थे। टेलर को उन्होंने कपड़े सुधारने के लिए वापस दिए। लेकिन, दोबारा भी बिना सुधारे लौटा दिए गए। अनावेदक टेलर की ओर से कहा गया कि उसने सही नाप से सिलकर दिए थे। अधिवक्ता आरके सिंह सैनी ने तर्क दिया कि टेलर ने सही नाप से सिलने का कोई साक्ष्य पेश नहीं किया। अंतिम सुनवाई के बाद फोरम ने अनावेदक टेलर को दोषी पाकर हर्जाना व सिलाई की रकम अदा करने को कहा।
अधिकारों की बात
लेडीज टेलर पर जुर्मानें का यह मामला चर्चा का विषय बन गया। कारण यह था कि महज ब्लाउज व अन्य वस्त्रों का मामला उपभोक्ता अदालत तक पहुंच गया। इन चर्चाओं पर महिला अधिवक्ता का पक्ष भारी पड़ा। श्रीमती पारे ने कहा कि गलत चीज हमेशा गलत है। भूल सुधार का मौका दिए जाने के बाद भी टेलर ने अपने पेशे की गरिमा का खयाल नहीं रखा। उसने उस उपभोक्ता के साथ विश्वासघात किया जो वर्षों से उस पर भरोसा करता रहा। राशि की बात नहीं है, लेकिन विश्वास को ठेस पहुंचाने और फिर गलती की क्षमा याचना भी नहीं करने वाले टेलर को यह सबक जरूरी था। इससे महिलाओं में भी एक संदेश जाएगा कि अपने अधिकारों के लिए वे कैसे सजगता से कदम उठा सकती हैं।
Published on:
16 Oct 2018 10:31 pm
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