
vaisakh month me kya karen, vaisakh mah ki vrat katha in hindi
जबलपुर. स्वास्थ्य, आध्यात्मिक और सेवा की दृष्टि से देखा जाए तो समय-समय पर होने वाले दान पुण्य हर प्रकार से लाभदायी होते हैं। इनके पीछे वैज्ञानिक सोच भी छिपी होती है, इन्हीं के आधार पर हमारे पूर्वजों ने दान पुण्य के कर्म व वस्तुओं को निर्धारण किया था। दान पुण्य के मामले में वैशाख माह सबसे उत्तम माना गया है। इस माह में किया गया पुण्य कार्य न केवल आत्मिक संतुष्टि प्रदान करता है, बल्कि शारिरिक व्याधियों से निजात पाने में भी सहायक होता है।
दान के साथ स्वयं के लिए भी लाभदायी
ज्योतिषाचार्य पं. सचिनदेव महाराज ने बताया वैशाख माह में बेल, शीतल जल पात्र, चप्पल, गमछा, सत्तू, आम का दान करने का महत्व शास्त्रों में बताया गया है। इसके अलावा स्वयं भी इनका उपयोग करने की बात कही गई है। नदियों में चूंकि शीतल व औषधीय जल प्रवाहित होता है, जो शरीर के कई प्रकार के रोगों से मुक्ति दिलाता है, इसलिए इस माह में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। वैशाख माह को इसलिए पुण्य का माह भी कहा जाता है। इस माह में कथा पूजन करना श्रेष्ठफलदायी होता है।
श्रेष्ठ माह है वैशाख
ज्योतिषाचार्य पं. सचिनदेव महाराज ने बताया गर्मी की तपिश से वैशाख माह में अधिकतर नदी-तालाब सूख जाते हैं। जिससे पक्षियों को पीने का पानी नहीं मिल पाता है। इस महीने में सूर्य अपने पूर्ण प्रभाव में रहता है, इसी वजह से वैशाख महीने में जल और छाया दान के साथ स्वस्थ रहने के लिए ऋतु फलों के दान करने का महत्व अधिक है। वैशाख महीना धर्म-कर्म की दृष्टि से बहुत खास है। इन दिनों में किए गए जल दान का अक्षय पुण्य मिलता है।
Updated on:
30 Apr 2024 01:48 pm
Published on:
30 Apr 2024 01:48 pm
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