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सड़कों पर फिर दौड़ेगी जबलपुर की पहचान जोंगा जीप

सामने आएगा नया अवतार, वीकल फैक्ट्री फिर करेगी उत्पादन

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जबलपुर@ज्ञानी रजक . 90 के दशक में सेना की शान रही जोंगा जल्द नए अवतार में नजर आएगी। वीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) वाहन का उत्पादन फिर शुरू करने जा रहा है। इसे सेना के साथ आम आदमी भी खरीद सकेंगे। जोंगा एसयूवी केटेगरी का वाहन होगा। पूर्व में भी इसे ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम इलाकों में आवागमन का महारथी माना जाता रहा है।

जोंगा वाहन का उत्पादन ब्रिटिश काल में पहले जीसीएफ फिर 1970 से वीएफजे में शुरू हुआ। यह संभवत: इकलौता ऐसा ब्रांड है जिसमें जबलपुर शहर का नाम शामिल है। जोंगा का पूरा नाम जबलपुर आर्डनेंस एंड गन कैरिज असेंबली है। इस नाम के अक्षरों को संक्षिप्त कर जोंगा नाम दिया गया था। 70 के दशक से 1998 तक सेना में इस वाहन की बहुत मांग थी।

एसयूवी प्रकार का ऑफरोड वाहन

वीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) ने वाहन का उत्पादन फिर शुरू करने की योजना बनाई है। यह एसयूवी प्रकार का ऑफरोड वाहन होगा। इसका इस्तेमाल ऊबड़-खाबड़ और दुर्गम इलाकों में आसानी से किया जा सकता है। इसकी डिजाइन पर काम शुरू हो गया है। कई तरह के फीचर वाला यह मध्यम आकार का वाहन सेना और अर्धसैनिक बल के साथ सिविलियन के लिए उपलब्ध होगा। वीकल फैक्ट्री की शुरुआत में निशान, शक्तिमान और जोंगा जीप प्रमुख उत्पाद थे। इसका उपयोग दुर्गम इलाकों में पहुंचने के लिए किया जाता था।

हेरिटेज वाहन के रूप में उपयोग

हैवी इंजन और मजबूत बॉडी होने के कारण सेना में इसकी खूब मांग थी। 70 के दशक में इसका उत्पादन वीएफजे में शुरू हुआ। वर्ष 1996-97 तक उत्पादन हुआ। बाद में सेना ने इसे मॉडिफाइड करने के लिए कहा था। तकनीकी खामियाें से प्रोजेक्ट बंद फैक्ट्री में वाहन का मॉडिफाइड वर्जन तैयार किया गया था लेकिन तकनीकी कारण और डिजाइन को लेकर विवाद होने पर प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया। सिविलियन के लिए भी जोंगा जीप बनाई गई थी। आज भी कुछ लोग इसे हेरिटेज वाहन के रूप में उपयोग करते हैं।

स्टालियन लाइन में किया जाएगा उत्पादन

एक साल के भीतर इसे तैयार करने की योजना बनाई गई है। इसका उत्पादन स्टालियन लाइन में किया जाएगा। खुद की होगी डिजाइन यह 4 बाय 4 वाहन होगा। रक्षा कंपनी आर्मर्ड वीकल निगम लिमिटेड की इकाई वीएफजे इसका डिजाइन खुद तैयार कर रही है। अभी जो वाहन यहां पर तैयार हो रहे हैं, उनका उत्पादन किसी देश या निजी कंपनियों से ट्रांसफर ऑफ टेक्नालॉजी के तहत किया जा रहा है। नई जोंगा में पूरी डिजाइन और फीचर वीएफजे के होंगे। नए मुख्य महाप्रबंधक ने इस प्रोजेक्ट को एक साल के भीतर स्थापित करने की योजना बनाई है।

मैकेनिकल क्षेत्र में कई अमूलचूल परिवर्तन

इसमें बीएस-6 के 150 एचपी का हैवी इंजन और दूसरी सुविधाएं होंगी। बताया जाता है कि इसका डिजाइन पुराने जोंगा की तरह होगा लेकिन मैकेनिकल क्षेत्र में कई अमूलचूल परिवर्तन किए जाएंगे। अधिकारियों की शान था जाेंगा जोंगा जीप वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को स्टाफ कार के रूप में आवंटित होती थी। इसमें बंदूक लगाने की सुविधा थी। वीएफजे में लगातार इसका उत्पादन चला। बाद में सेना ने इसकी जगह दूसरे वाहनों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। मांग नहीं होने से उत्पादन बंद हो गया।

वीएफजे में अब तक यह वाहन बने

त्रिशूल, मतंग, निशान, शक्तिमान, जोंगा, हमसफर बस, टिपर, वाटर बाउजर, माइन प्रोटेक्टिड वीकल, मॉडिफाइड माइन प्रोटेक्टिड वीकल, एलपीटीए, स्टालियन, किचिन कंटेनर, बैटरी कमांड वीकल, सिविल जोंगा, 155 एमएम शारंग तोप, बुलेट प्रूफ जीप, टाटा 407 के अलावा जहाज में लगने वाले यूटीडी इंजिन की ओवरहालिंग।

अटलबिहारी बाजपेयी को भी यह जीप भेंट की

वीएफजे ने जब सिविल जोंगा बनाया था तब उस जीप के लोग दिवाने थे। शहर के साथ-साथ देश के नामी गिरामी लोगों के पास यह जीप होती थी। क्लासिकल डिजाइन होने के कारण यह लोगों को खूब लुभाती थी। इसका भरपूर उत्पादन होता था। बताया जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटलबिहारी बाजपेयी को भी यह जीप भेंट की गई थी। यह जीप परेड में खूब इस्तेमाल होती थी। वीएफजे में तो हर कार्यक्रम में इसका इस्तेमाल किया जाता था। सजी-धजी यह जीप आकर्षण का केंद्र रहती थी।

जोंगा फैक्ट्री का मुख्य उत्पाद रहा है। अब फिर से इसके उत्पादन की योजना बनाई गई है। इसकी डिजाइन और फीचर फाइनल किए जा रहे हैं। यह एसयूवी वाहन होगा। सेना के साथ सिविलियन के लिए इसका वर्जन तैयार किया जाएगा। रामेश्वर मीणा, संयुक्त महाप्रबंधक एवं जनसंपर्क अधिकारी, वीएफजे

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