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सेना को चाहिए युद्धक वाहन, ऑर्डर लेने की तैयारी में वीएफजे

सुरंगरोधी, एलपीटीए और स्टालियन वाहन का होना है उत्पादन

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combat and anti-mine vehicles

जबलपुर . स्टालियन और एलपीटीए जैसे युद्धक और सुरंगरोधी वाहन (एमपीवी) की जरूरत को देखते हुए सेना की ओर से मांगे गए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल में वीकल फैक्ट्री जबलपुर भागीदारी करेगी। यह तीनों वाहन जबलपुर में बनते हैं। इनकी सप्लाई सेना को होती है। फैक्ट्री को यह ऑर्डर मिल सकता है।

नए वित्तीय वर्ष में रक्षा कंपनियों के अंतर्गत आने वाली आयुध निर्माणियों को वर्कलोड के लिए जद्दोजहद करनी पडे़गी। वीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। सेना को हमेशा वाहनों की आश्यकता होती है। पहले सीधे इनका ऑर्डर मिल जाता था लेकिन वर्ष 2021 से निगम में तब्दील होने के कारण उसे खुली स्पर्धा में भाग लेना पड़ रहा है। सेना ने सुरंगरोधी, स्टालियन तथा एलपीटीए के उत्पादन के लिए वाहन निर्माताओं से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) मांगा है।

ज्यादा वर्कलोड की आवश्यकता

वीएफजे कई दशकों से सैन्य वाहनों का उत्पादन कर रही है। तीन हजार से अधिक कर्मचारियों के पास काम की कमी नहीं रहती। गत वित्तीय वर्ष में 640 करोड़ रुपए के वाहनों का उत्पादन किया गया है। सभी एलपीटीए और स्टालियन वाहन तैयार कर लिए गए हैं। अब केवल कुछ सुरंगरोधी वाहन रह गए हैं। अब उसे ज्यादा वर्कलोड की आवश्यकता होगी। सेना की ओर से निकाली गई आरएफपी के लिए उसने सारी तैयारियां कर ली हैं। इस आरएफपी के जरिए बड़ी संख्या में तीनों प्रकार के वाहनों को तैयार किया जाना है।

सबकी अलग क्षमता

एलपीटीए और स्टालियन अलग-अलग आकार और क्षमता वाले वाहन हैं। इनका उत्पादन दो दशक से ज्यादा समय से किया जा रहा है। इन युद्धक वाहनों का उपयोग सैनिकों को अलग-अलग स्थानों पर लाने ले जाने के अलावा हथियारों के परिवहन में किया जाता है। इसी प्रकार एमपीवी की बात करें तो सेना व अर्धसैनिक बलों की गश्ती में यह काम आते हैं। आतंकवाद और नक्सल प्रभावित इलाकों में बारूदी सुरंगों से निपटने में यह कारगर हैं।

नई रणनीति बनाई

निगम बनने के बाद नया वर्कलोड लाने के लिए वीएफजे ने नई रणनीति बनाई है। प्रबंधन ने मार्केटिंग व आरएंडडी टीमों का गठन किया है। इसमें विशेषज्ञ अधिकारी और कर्मचारियों को रखा है। चार अप्रेल से मार्केटिंग की आठ टीमें तीनों सेना, अर्धसैनिक बलों के अलावा राज्य पुलिस के मुख्यालय में जाकर संपर्क करेगी। वह उनकी जरूरतों को समझेंगी। इसी तरह आरएंडडी की टीम 8 से 9 नए प्रोडक्ट पर काम कर रही हैं। वह ग्राहकों से संपर्क करेगी। वह उन्हें यह प्रस्ताव देगी कि जो वाहन वे इस्तेमाल कर रहे हैं उनमें क्या नए बदलाव चाहते हैं। उन्हें अपग्रेड करना और ओवरहालिंग का काम किया जा सकेगा।

फैक्ट्री में वर्कलोड बढ़ानेे के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सेना की आरएफपी में हम भागीदारी करेंगे। उम्मीद है कि यह बड़ा ऑर्डर हमें मिले। इसी प्रकार मार्केटिंग और आरएंडडी टीमों की मदद से इस दिशा में काम करने की योजना बनाई है।

रामेश्वर मीणा, जनसंपर्क अधिकारी वीएफजे

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