
Wild animals causing damage to crops
मयंक साहू@जबलपुर.
वन्य जीवों की प्यास बुझाने का मामला हो या फिर जंगल की आग। बढ़ती भीषण गर्मी में ही इस समय दोनों ही असरि क्षित हैं। वन्य जीव जहां पानी के लिए भटक रहे हैं तो वहीं जंगल में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही है। वन अमला वन्य जीवों को राहत देने में नाकाम है। दूसरी और ग्रामीणों में खेतों में नरवाई जलाने, प त्तियां जलाने आदि में जागरूकता का अभाव भी वन अमले के लिए परेशानी खड़ी कर रहा है।
प्यास से दम तोड़ रहे वन्य जीव
लगातार बढ़ती गर्मी और बढ़ते तापमान का असर वन्य जीवों पर भी देखा जा रहा है। जंगल के अंदर पानी के सीमित जलस्त्रोत सूखने लगे हैं जिससे वन्य प्रा णी प्यास से जंगल से भटककर शहर और गावों की तरफ कूच कर रहे हैं। वन्य जीव प्यास से दम तोड़ रहे हैं, लेकिन वन अमला वन्य जीवों की प्यास बुझाने में कोई ठोस कदम नहीं उठा पा रहा है।
नहीं बनाए गए पोखर
गर्मी की शुरुआत के साथ वन रेजों में पोखर, झिर साफ करने, पानी को स्टोर करने की तैयारी शुरू हो जाती है लेकिन जबलपुर वन मंडल में कई रेंजों में अब तक पानी के लिए अ तिरिक्त व्यवस्था नहीं की जा सकी है। बरगी, डुमना, बारहा, कुंडम, पनागर के जंगलों में ऐसी ही िस्थति बताई जाती है। नए पोखर का निर्माण ही नहीं किया गया है।
बार बार सामने आई घटनाएं
पिछले एक माह के दौरान कई बार इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं जिसमें वन्य जीव पानी की तलाश में सड़क अथवा गांव तक पहुंच गए। कुछ घटनाओं में वन्य जीव पर आवारा कुत्तों के हमले के कारण उनकी मौत तक हो चुकी है।
- पानी की तलाश में जंगल से भटककर आनंद नगर में पहुंचे एक हिरण पर रात्रि में आवारा कुत्तों ने हमला कर मार डाला।
-14 दिन पहले एक सांभर पानी की तलाश में जंगल से निकलकर चरगंवा में पहुंच गया, जिसे सुर क्षित बचाया गया।
-करीब दस दिन पहले डुमना के जंगल से एक चीतल पानी की तलाश में सड़क पर आ गया था।जिसपर कुत्तों ने हमला कर दिया।
................
चंद फायर वॉचर के भरोसे निगरानी
जानकारों के अनुसार कई वन रेंजों में करीब 50 से 60 फायर वॉचर रखे गए हैं जबकि इनकी संख्या 150 होनी चाहिए। ऐसे में एक रेंज चंद फायर वॉचरों के भरोसे पूरे जंगल की निगरानी व्यवस्था है। जबकि हर रेंज में 15 से 20 फायर वॉचर की जरूरत है। बजट की कमी के चलते सीमित संख्या रखी गई है।
आग लगने के मामले में दूसरे नंबर पर प्रदेश
जानकारों के अनुसार एफएसआई की रिपोर्ट के अनुसार जंगल में लगने वाली आग के मामले में मध्यप्रदेश दूसरे नंबर पर है। जंगलों में आग लगने के मामलों में उडीसा पहले नंबर पर है। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में 47 हजार 795 अग्नि दुर्घटनाएं सामाने आई हैं।
आग लगने की मुख्य वजह
-खेतों नरवाई, पलागी जलाने से आग लगना
-महुआ बीनने के दौरान सफाई करने पत्तियों में लगाई गई आग।
- ग्रामीणों के द्वारा बीड़ी, सिगरेट पीकर उसे जलती हुई स्थिति में फेंकना।
-कैंप फायर के दौरान आग लगने की होती हैं घटनाएं
........
-गर्मी में अ ग्निहादसों को देखते हुए हम पूरी तरह से सतर्कता बरत रहे हैं। जंगल की निगरानी के लिए फायर वॉचर को रखा गया है। पानी के लिए भी वैक ल्पिक व्यवस्था बनाने की कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों को भी जागरूक कर रहे हैं।
-प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, उप वनमंडल अ धिकारी
Published on:
18 Apr 2022 12:51 pm

बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
