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महिला सुरक्षा अभियान: एक दूसरे के सम्मान की सीख से घटेगा अपराध का ग्राफ, घरों से इसकी शुरुआत

पत्रिका टॉक शो में वृंदा फाउंडेशन के सदस्यों ने रखी अपनी बात, बताए सुरक्षा के उपाए

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women safety

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women safety : पैरेंट्स को चाहिए कि बचपन से ही बेटे-बेटियों को इस बात की सीख दें कि दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। रक्षक बनकर दोनों को एक दूसरे की मदद करनी है, सम्मान करना है। क्योंकि संस्कारों से बढकऱ कोई दूसरी शिक्षा महिला अपराधों को कम नहीं कर सकती। ये बात पत्रिका के अपराधों के विरुद्ध महिला सुरक्षा अभियान के अंतर्गत समाजसेवी शिवानी पांडे ने कही। उन्होंने ने कहा वुमन्स डे का सही मायने में अर्थ यही है कि वो दिल से खुद को सुरक्षित महसूस करे। तभी हम कहेंगे कि महिलाएं अब सुरक्षित हैं। टॉक शो में आई महिलाओं का तुलसी के पौधे देकर स्वागत किया गया।

women safety : बेटियां सम्मान की हकदार

दीपिका पांडे ने कहा परिजनों को अपने बच्चों को यह बात समय समय पर बताते रहना होगी कि बेटियां सम्मान की हकदार हैं। फिर चाहे वो खु की बहन हो या बाहर मिली कोई अन्य लडक़ी, सभी को आदर की दृष्टि से देखना हमारा कर्तव्य है। पार्षद पूजा पटेल ने कहा आज महिलाएं पुरुषों के बराबर काम कर रही हैं। वे बहुत हद तक सुरक्षित भी हैं, माता पिता टीचर्स बेटियों को आत्मरक्षा के गुर जरूर सिखाएं। सही गलत की पहचान बताने की जरूरत है। पार्षद प्रिया तिवारी ने कहा जबलपुर में वैसे तो महिलाओं को बहुत सम्मान होता है। लेकिन जो अपराध हो रहे हैं, उन्हें मिलकर कम करना होगा, पीडि़ता के साथ खड़े होकर उसे न्याय दिलाया जाए और अपराधी को सजा दिलाने में सहयोग करना होगा।

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women safety : अपने अधिकारों को लेकर आवाज उठाने लगी हैं महिलाएं

अर्चना सिंह ने कहा हर क्षेत्र में महिलाएं आगे हैं, पहले की अपेक्षा वे अब खुलकर अपने अधिकारों को लेकर आवाज उठाने लगी हैं। जिससे उनके साथ अब अपराधों में कमी भी आई है। प्रीति मिश्रा ने कहा मातृशक्ति को आत्मनिर्भर बना दिया जाए, उसे डरकर चुप रहने के बजाय आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया जाए तो अपराधों में बहुत हद तक कमी आ सकती है। वो नेतृत्व करते हुए अपराधियों के खिलाफ खुद खड़ी होने में सक्षम होगी तो अपराधियों में भी भय आ जाएगा। इस दौरान विक्की मार्वे, विजय सोलंकी, संदीप गौर, अभिषेक राठौर, अर्चना तिवारी, प्रदीप पटेल, कल्पना तिवारी, दीप्ति यादव, श्वेता पांडे, नीतू गुप्ता, चंद्रशेखर शर्मा आदि वक्ताओं ने अपनी बात रखी।

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