
Kidney Stones
जबलपुर। हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में मरीज के दोस्त को ट्रांसप्लांट के लिए किडनी दान देने की मंजूरी दे दी। कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता जिंदगी और मौत से लड़ रहा है, इसलिए किडनी ट्रांसप्लांट की सर्जरी तत्काल कराई जाए। जस्टिस एसए धर्माधिकारी की एकलपीठ ने कहा कि अब इस मामले में देरी नहीं की जानी चाहिए। सरकार ने इस मामले में नियमों का हवाला देते हुए किडनी दान करने की एनओसी नहीं दी थी।
दोस्ती की मिसाल भोपाल निवासी सुरेश गर्ग और राम प्रसाद पांडेय की यह कहानी भावुक कर देने वाली है। सुरेश लंबे समय से किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं। काफी उपचार के बाद डॉक्टरों ने प्रत्यारोपण ही आखिरी उपाय बताया। जब परिवार के सदस्यों की किडनी मैच नहीं हुई तो उनके दोस्त रामप्रसाद आगे आए। उन्होंने किडनी दान करने की तमाम प्रक्रियाएं पूरी कीं, लेकिन सरकारी नियम आड़े आ गए। इसमें कहा गया है कि कोई सगा संबंधी ही किडनी दान कर सकता है। इस आधार पर आवेदन निरस्त करते हुए सरकार की ओर से एनओसी जारी नहीं की गई।
हो सकता है किडनी ट्रांसप्लांट
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि राम प्रसाद किडनी डोनेट कर रहे हैं, लेकिन नियम आड़े आ रहा है। कोर्ट को बताया गया कि ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स (अमेंडमेंट) एक्ट 2011 के तहत केवल खून के रिश्ते या करीबी रिश्तेदार की ही किडनी ट्रांसप्लांट की जा सकती है। जबकि राम प्रसाद अपनी इच्छा से दोस्त को किडनी दान करना चाहते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सभी जांचें करने के बाद पाया कि किडनी ट्रांसप्लांट की जा सकती है। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी उक्त अधिनियम के तहत सरकार द्वारा गठित अधिकृत कमेटी ने दो बार ट्रांसप्लांट की एनओसी देने से इनकार कर दिया। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जान बचाना जरूरी है, इसलिए जितना जल्द हो सके किडनी ट्रांसप्लांट कराई जाए।
Published on:
27 Sept 2022 11:01 am
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