जबलपुर. कृषि विश्वविद्यालय के जवाहर प्रांगण में आयोजित किसान मेले में फिसरी के छात्रों की रचनात्मकता चर्चा में रही। छात्रों के स्टॉल में मछली के स्केल्प से बने कान के झुमके के साथ हिरन, डक के जोड़ों की कलाकृति ने लोगों को आकर्षित किया। 3.5 फीट लम्बी करीब 6 किलो वजन की लौकी भी कौतुहल का विषय थी। तीन दिवसीय मेले का बुधवार को समापन हुआ।
किसान मेले का समापन, छात्रों की कृति को मिली सराहना
3.5 फीट लम्बी 6 किलो की लौकी बनी कौतुहल
100 रुपए का खर्च, 400 की कमाई
फिशरी कॉलेज के डीन डॉ. एसके महाजन, डॉ. सोना दुबे ने बताया कि मछली के स्केल्प से अनेक कलाकृति, मोमेंटो तैयार किए हैं। इसकी कास्ट पैकिंग के साथ 100 से 150 रुपए आती है। जबकि, बाजार में यही 400 रुपए तक में बेचा जाता है। इसी तरह मंडला कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. विशाल मेश्राम, रंजीत कछवाहा भी जैविक सेमी, किमाच बरबटी लेकर आए थे। सेमी-बरबटी की लंबाई करीब एक फीट थी।
केंद्रों को पुरस्कार
अंतिम दिन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक अशोक रोहाणी ने टीम को बधाई दी। कुलपति डॉ. पीके बिसेन ने किसानों, कृषि विज्ञान केंद्रों को सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। संचालक विस्तार सेवाएं डॉ. ओम गुप्ता, वीयू के कुलपति डॉ. पीडी जुयाल, अधिष्ठाता डॉ. धीरेंद्र खरे, कुलसचिव डॉ.अशोक इंग्ले आदि ने जानकारी दी।
लौकी को देख हैरानी
मेले में लाई गईं 3 फीट से लेकर 3.5 फीट लम्बी लौकी पाटन तहसील के किसान बबलू झारिया के खेत में उगाई गई थीं। प्लंटो कंपनी इंदौर से आए प्रबंधक रमेश राठौर ने जानकारी दी।