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जबलपुर. कई लोगों में यह देखने को मिलता है कि छोटी सी चोट लग जाने के बाद भी लम्बे समय तक खून का बहाव बना रहता है। यह कारण लोगों द्वारा अपने नजरिए से अलग-अलग भले ही लिया जाता है, लेकिन यह कारण हीमोफीलिया का होता है। यह एक तरह की जेनेटिक बीमारी है, जो महिलाओं की बजाय पुरुषों में अधिक देखने को मिलती है। इस रोग से ग्रसित लोगों में शरीर से खून बहना बंद नहीं होता और फिर रोगी की मौत हो जाती है। कभी-कभी बिना चोट लगे भी कोहनी, घुटने और कूल्हे में इंटर्नल ब्लीडिंग भी होती है, जिससे रोगी की असहनीय पीड़ा होने के साथ विकलांग होने की खतरा भी बना रहता है। वहीं चोट लगने पर इसके परिणाम गंभीर होते हैं।
जागरूकता की जरूरत है
डॉक्टर्स का कहना है कि शहर में ज्यादातर लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं हैं कि उन्हें हीमोफीलिया है। एक्सीडेंट और गंभीर चोट लगने की स्थिति में होने वाली जांचों के दौरान इसके बारे में पता चलता है। हीमोफीलिया होने का सबसे बड़ा कारण क्लोटिंग फैक्टर 8 की कमी का होना है। प्रति 10 हजार लड़कों में किसी एक को यह बीमारी मिलती है। इसके लिए जरूरी है कि सभी को एक बार हीमोफीलिया से संबंधित जांच करवानी चाहिए।
ऐसे होते हैं प्रकार
1. हीमोफीलिया बी
- इसमें थक्का जमाने वाले क्लोङ्क्षटग फैक्टर में 9 की कमीं होती है।
- यह मामता प्रति 50 हजार लड़कों में किसी एक को जन्म के समय होता है।
2. हीमोफीलिया सी
- इसके बहुत कम मामले सामने आते हैं। यह क्रोमोजोन की कार्यप्रणाली बिगडऩे से होता है।
- इसमें ब्लीडिंग तेजी से होती है।
ऐसे पड़ता है असर
- 15 से 25 हीमोफीलिया के मरीजों में ट्रीटमेंट के दौरान इम्युनिटी पावर कम हो जाती है।
- रोगी पर दवाओं का असर नहीं होता।
- कई बार स्थिति गंभीर बन जाती है।
- छोटी चोट लगने पर भी अधिक खून का बहना।
- शरीर के हिस्सों में हमेशा दर्द बना रहा।
- आम लोगों ने इनकी जिन्दगी 10 से 12 साल कम होती है।
ऐसे होता है इलाज
शहर में हीमोफीलिया रोगियों को योग और फिजिकल थैरेपी के जरिए ट्रीटमेंट दिया जाता है। इसमें मरीज को पहले योग और प्राणायाम सिखाया जाता है और फिर इसके बाद फिजिकल एक्टिविटीज कराई जाती हैं। इससे बोन्स और मसल्स मजबूत मिलने में मदद मिलती है।
Published on:
17 Apr 2019 12:12 pm
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