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कभी था सबसे कमजोर, अब है फाइट मास्टर नेशनल वूशू चैम्पियन, ऐसे बदली दुनिया

नेशनल वूशू चैंपियन पंकज कोष्टा की कहानी

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wushu champion pankaj koshta real story of weakness to success

लाली कोष्टा@जबलपुर। जब उसका जन्म हुआ तब लोगों ने कहा ये जीवन कैसे जिएगा, इसकी तो गर्दन टेढ़ी है। लोग उसे प्यार से कम दया भाव से ज्यादा देखते थे। लेकिन एक पिता के संकल्प और बेटे की इच्छाशक्ति जब मिली तो उसने पूरे देश में नाम कमाया और जबलपुर शहर का नाम भी रोशन किया। यह कहानी है राष्ट्रीय स्तर पर वूशू में प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी पंकज कोष्टा की, जिन्होंने कम उम्र में ही राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में जज से लेकर नेशनल रेफरी पैनल तक में जगह बनाई है। पंकज बताते हैं कि 2001 में मैं वूशू का प्रशिक्षण लेने अपने गुरु मनोज गुप्ता के पास जाता था तब लोग मेरा प्रोत्साहन कराने की जगह उपहास करते थे। मेरे माता-पिता और मेरे गुरु ने हमेशा मेरा प्रोत्साहन किया और सही मार्ग दिखाया। उनके इस प्रोत्साहन की वजह से मैं उत्साह के साथ उनके बताए रास्ते पर चलता गया और आज मैं 11 से ज्यादा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर ब्रांज, सिल्वर और गोल्ड मेडल जीत चुका हूं।

जो टेढ़ी गर्दन का मजाक उड़ाते थे आज वही मुझसे आत्मरक्षा की ट्रेनिंग लेते हैं, पंकज कहते हैं समय और मेहनत के साथ सब कुछ बदलता है। पहले लोग दया की दृष्टि से देखते थे, अब जहां भी जाता हूं लोग सम्मान की नजर से देखते हैं।

बेहद कमजोर था शरीर
पंकज ने बताया कि गर्दन टेढ़ी होने के साथ शारीरिक रूप से भी मैं बहुत कमजोर था। दुबला पतला होने की वजह से दोस्त मेरा बहुत मजाक उड़ाते थे। हालांकि दोस्तों के मजाक ने मेरे मन पर गहरा असर डाला और मैं मन ही मन खुद को साबित करने का विचार प्रबल करने लगा। इसके बाद वुशु प्रशिक्षक मनोज गुप्ता से मिलना हुआ। उन्होंने मेरे जीवन को नई दिशा दी। उन्होंने शरीर की कमजोरी को मजबूती में बदलने का रास्ते बताए। धीरे धीरे में अपने से मजबूत दिखने वाले प्रतिस्पर्धियों को शिकस्त देने लगा। इससे मेरा मनोबल बढ़ता गया और मैं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगा।

कमजोर को मजबूत बनाना ही लक्ष्य
पंकज अब ट्रेनर बन चुके हैं। कई जगह लोगों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। वे कहते हैं- ‘मेरे जीवन का उद्देश्य है कि जो भी व्यक्ति कमजोर हैं, वे अपनी कमजोरियों को दूर कर मजबूत बनें।’ उन्होंने बताया कि कई लोग उनसे व्यक्तिगत ट्रेनिंग ले रहे हैं। कई संस्थानों में भी मैं प्रशिक्षण दे रहा हूं। उन्होंने कहा कि उन्हें बहुत खुशी होती है जब दूसरे लोग उनके प्रशिक्षण के कारण शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनते हैं।

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