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जब्बे को सलाम: गैंगरीन पीडि़तों को कराया स्नान, लगाया अपनत्व का मरहम

पीडि़त मानवता की सेवा को मोक्ष के युवाओं ने किया साकार, गैंगरीन पीडि़तों को नहलाकर निभाया सच्ची मानवता का धर्म 

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Prem Shankar Tiwari

Nov 07, 2016

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जबलपुर। जिन्हें नौ माह तक कोख में ढोया। मेहनत मजदूरी करके पाला-पोसा उन्होंने ही मुंह मोड़ लिया। अब गैंगरीन जैसा घातक रोग, एकाकीपन और इसका दर्द ही उनके साथ है। हालात ये हैं कि शरीर से आ रही दुर्गंध और अन्य मरीजों को इंफेक्शन होने के भय से डॉक्टरों ने भी उसे विक्टोरिया अस्पताल के शेड के नीचे शरण दिला दी। बात हो रही है गैंगरीन पीडि़त राजकुमारी की...। मोक्ष मानव सेवा समिति के युवाओं ने आज राजकुमारी ही नहीं, अन्य गैंगरीन पीडि़तों को भी हाथों से नहलाया। नए कपड़ पहनाए। अपनत्व के मरहम से न केवल राजकुमारी की आंखें डबडबा आईं बल्कि उनकी पीडि़त मानवता की सच्ची सेवा इस दृश्य को देखकर लोग भी द्रवित हो गए। सभी ने मोक्ष के युवाओं के जज्बे को सलाम किया।


यही है सच्ची पूजा

उम्र के चौथे पड़ाव से गुजर रहीं राजकुमारी का विक्टोरिया अस्पताल के खुले शेड की नीचे बसेरा है। शरीर पर कीड़े चल रहे हैं। रोग ने हालात ये कर दिए हैं कि शरीर दुर्गंध फेकने लगा है। जिनको पैदा किया उन्होंने तो बिसार ही दिया। राजकुमारी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि अब जिंदगी में वह दिन भी आएगा, जब कोई हाथों से नहलाएगा, लेकिन सेवा का धर्म निभाने वाले आशीष ठाकुर की टीम के प्रशांत ठाकुर, आराधना और गुड्डू ने सेवा के सर्वोत्तम धर्म को साकार किया। उन्होंने राजकुमारी ही नहीं बल्कि समीप ही पड़े अन्य गैंगरीन मरीज 55 वर्षीय गुलरेज खान को भी नहलाया। हाथों से एक-एक कीड़े हटाए। दवा लगाई और नए कपड़े भी पहनाए। दोनों ने कहा कि सगा बेटा भी होता तो ऐसे नहीं नहलाता.. ये तो सचमुच फरिश्ते हैं...।


हर रोज करते हैं देखभाल

मोक्ष संस्था के संयोजक आशीष ठाकुर ने बताया कि संस्था से जुड़े सदस्य रोजाना अस्पतालों में जाकर जरूरतमंदों की सेवा करते हैं। गैंगरीन पीडि़तों की भी देखभाल की जाती है। युवाओं का कृतित्व देखकर अभिभूत हुए लोगों ने उन्हें दिल से दुआएं दीं और उनके कार्य को ईश्वर की सच्ची आराधना बताया। सेवा कार्य करने वालों में रोहित तिवारी, एड.नीरज शुक्ला, नीरज मिश्रा, अनुपम, प्रवीण शुक्ला, आशीष तिवारी सुरेन्द्र, प्रदीप, कृष्णा मूर्ति पिल्लई ,अरविन्द नाहर, दुर्गेश, मुकेश साहू, अनामिका सिंह, सुनीता सिंह, स्वाति मिश्र ,लता, बिन्दु पांडेय, आफरीन, प्रीती श्रीवास्तव, नूतन आदि शामिल हैं।

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अपनों ने छोड़ा

बताया गया है कि 75 वर्षीय राजकुमारी व गुलरेज को करीब छह माह पूर्व कोई विक्टोरया अस्पताल में छोड़ गया है। इसके बाद किसी ने उनकी सुधि नहीं ली। राजकुमारी व गुलरेज ने रूंधे गले से कहा कि शरीर से बदबू आती है, इसलिए खुद के बच्चे तक पास में नहीं आते। सबने भुला दिया है। अब बस ऊपर वाले का सहारा है।

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