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बढे सैलानी: दो साल में देखा सबसे बुरा दौर, अब बस्तर के प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट पर बढ़ी पर्यटकों की भीड़

Number of tourists increased in Bastar: बस्तर के पर्यटन उद्योन ने बीते दो सालों में सबसे बुरा दौर देखा है। संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में कई प्रमुख होटलों में इस दौरान तालाबंदी की स्थिति बन गई थी लेकिन कोरोना की लहर का कहर थमने के बाद अब स्थिति बदली है।

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बढे सैलानी: दो साल में देखा सबसे बुरा दौर, अब बस्तर के प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट पर बढ़ी पर्यटकों की भीड़

बढे सैलानी: दो साल में देखा सबसे बुरा दौर, अब बस्तर के प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट पर बढ़ी पर्यटकों की भीड़

Number of tourists increased in Bastar: बस्तर के पर्यटन उद्योन ने बीते दो सालों में सबसे बुरा दौर देखा है। संभागीय मुख्यालय जगदलपुर में कई प्रमुख होटलों में इस दौरान तालाबंदी की स्थिति बन गई थी लेकिन कोरोना की लहर का कहर थमने के बाद अब स्थिति बदली है। पिछले दो महीनों के भीतर बस्तर में पर्यटकों की आमद बढ़ी है। देसी के साथ ही विदेशी पर्यटक भी अब यहां पहुंच रहे हैं। इसकी शुरुआत दशहरा के दौरान से हो गई थी।

बस्तर दशहरा की शुरुआत के साथ ही यहां विदेशी पर्यटकों की आमद शुरू हो जाती है लेकिन बीते दो साल से विदेश पर्यटक बस्तर में दिख ही नहीं रहे थे। कोरोना गाइड लाइन की वजह से विदेशों से लोगों का आना काफी कम हो चुका था। पर्यटक तो आ ही नहीं रहे थे लेकिन अब हालात सुधरते ही पर्यटकों का आना-जाना शुरू हो चुका है। दशहरा के दौरान भी बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक शहर की सडक़ों पर दिखे और अब भी कई पर्यटक यहां दिख रहे हैं।

बस्तर के पर्यटन केंद्रों और यहां उपलब्ध सुविधाओं की री ब्रांडिंग करने की जरूरत पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग बताते हैं। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल को इस दिशा में पहल करनी चाहिए। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने इस पर काफी काम किया था लेकिन मौजूदा सरकार ने इस पर अब तक काम नहीं किया है। हालांकि इस बीच कोरोना की वजह से भी यह नहीं हो पाया लेकिन अब जबकि हालात सुधरे हैं तो इस पर काम किया जा सकता है। बस्तर के पर्यटन को नए सिरे से नई प्लानिंग के साथ प्रमोट किए जाने की जरूरत है। इसके लिए स्थानीय विशेषज्ञों से भी रायशुमारी की जानी चाहिए।

होम स्टे में रुककर बस्तर की संस्कृति को समझ रहे सैलानी

देश के बाहर से आने वालों के साथ ही देसी सैलानी भी बस्तर की अनूठी संस्कृति को समझने होम स्टे का रुख कर रहे हैं। बस्तर में होम स्टे का दायरा लगातार बढ़ रहा है। कोरोना की लहर खत्म होने के बाद मौजूदा सीजन में बस्तर में होम स्टे की संख्या बढ़ गई है। होम स्टे में रुककर पर्यटक बस्तर की कला और संस्कृति को करीब से समझ रहे हैं। बस्तर की संस्कृति को पर्यटक यू ट्यूब ब्लॉलिंग के जरिए देश-दुनिया तक भी पहुंचा रहे हैं।

टूरिज्म बोर्ड ने भी इस दिशा में काम शुरू किया है और चित्रकोट स्थित रिसॉर्ट की ऑनलाइन बुकिंग बड़े पैमाने पर हो रही हैं। यहां पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर भी काम हो रहा है। इसके अलावा बाकी के पर्यटन केंद्रों पर भी काम किया जा रहा है। लगभग दो साल के बाद जब पर्यटन उद्योग में रौनक लौटी है तो इसका सीधा असर बस्तर की अर्थ व्यवस्था पर पड़ा है।

पर्यटन से जुड़ा हर तरह के वर्ग को अब फायदा हो रहा है। होटल संचालक भी अब दो साल में हुए घाटे को कवर करने में जुट गए हैं। यही वजह है कि पिक सीजन की शुरुआत से ही होटलों के दाम काफी बढ़ चुके हैं। दो साल से रखरखाव के अभाव का सामना कर रहे होटल अब चमचमाने लगे हैं। कई तरह के ऑफर्स से पर्यटकों को लुभाया जा रहा है। बस्तर की होटल इंडस्ट्री के जानकार कहते हैं कि इस काम से जुड़े लोगों ने लंबे वक्त तक नुकसान झेला है लेकिन अब हालात बदल रहे हैं।

हर दिन बड़ी संख्या में लोग कर रहे संपर्क

जीत सिंह आर्या, अन एक्सप्लोर्ड बस्तर ने बताया कि हमारे ग्रुप के अलावा हर ग्रुप के पास इस सीजन में काम है। दो साल तो कोरोना में यूं ही बीत गए लेकिन अब काम बढ़ा है। देश के अलावा विदेशों से भी लोग बस्तर के पर्यटन केंद्रों के बारे में जानने के लिए हमसे अलग-अलग माध्यम से संपर्क कर रहे हैं। यह साल अच्छा रहने की उम्मीद हम कर रहे हैं।