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400 करोड़ के इस मेडिकल कॉलेज को इस वजह से रोज लगाना पड़ता है एक अस्पताल का चक्कर

संभाग के बड़े डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में सर्वसुविधायुक्त भवन और लाइसेंस मिलने के बाद भी शुरू नहीं हो रही ये सुविधा।

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400 करोड़ के इस मेडिकल कॉलेज को इस वजह से रोज लगाना पड़ता है एक अस्पताल का चक्कर

400 करोड़ के इस मेडिकल कॉलेज को इस वजह से रोज लगाना पड़ता है एक अस्पताल का चक्कर

जगदलपुर. मेडिकल कॉलेज में ब्लड बैंक के लिए सर्वसुविधायुक्त भवन तैयार है। वहीं इसके लिए लाइसेंस भी मिल चुका है। बावजूद मेकाज प्रबंधन ब्लड बैंक शुरू नहीं कर रहा है। ऐसे में इमरजेंसी के दौरान मरीजों को महारानी अस्पताल में संचालित ब्लड बैंक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में बने ब्लड बैंक को नियमों के तहत नहीं बनाने के कारण उसे लाइसेंस नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद मेकाज प्रबंधन को उन खामियों को दूर करने में दो से तीन साल लग गए।

ब्लड नहीं होने की वजह से हो चुकी है एक की मौत
अब लाइसेंस मिलने के बाद भी यहां पर ब्लड बैंक शुरू नहीं किया जा रहा है। 600 बिस्तर के मेडिकल कॉलेज में संभागभर के गंभीर मरीजों को रेफर किया जाता है। इसके अलावा एक्सीडेंट में घायल मरीजों को भी इलाज के लिए सीधे मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया जाता है। ऐसे में इन मरीजों के परिजनों को ब्लड की व्यवस्था के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। हालही में समय पर ब्लड नहीं चढ़ाने की वजह से मेकाज में एक महिला मरीज की मौत हो गई थी।

मेकाज में रोजाना 20-25 यूनिट ब्लड की खपत
मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन करीब 20-25 यूनिट ब्लड की खपत होती है। वहीं महारानी अस्पताल में रोजाना १० से १२ यूनिट ही ब्लड की खपत होती है। महारानी अस्पताल के मरीजों को तत्काल ब्लड मिल जाता है। वहीं मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीज के परिजनों को ब्लड के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को काफी दिक्कत होती है।

ब्लड संप्रेशन मशीन बंद
ब्ल ड बैंक बंद होने के कारण मेडिकल कॉलेज में लाखों रुपए की ब्लड कंपोनेंट सेपरेट मशीन कंडम हो रही है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन से बल्ड से प्लेटलेट्स, आरबीसी, डब्ल्यूबीसी व सिरम अलग किया जाता है। इसमें डेंगू के मरीज को प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ती है, तो बर्न वाले मरीजों को सिरम चढ़ाया जाता है। मेडिकल कॉलेज में मशीन बंद होने की वजह से इन मरीजों को सीधे रेफर कर दिया जाता है।