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नक्सलमुक्ति की दहलीज पर बस्तर, लेकिन IED का अदृश्य खतरा अब भी बरकरार, 2025 में एएसपी सहित 12 जवान हुए थे शहीद

CG Naxal IED Update: बस्तर नक्सलमुक्ति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन आईईडी बम अब भी सबसे बड़ा अदृश्य खतरा बना हुआ है। सुरक्षा बलों और निर्दोष ग्रामीणों की जान लेने वाला यह खतरा शांति की राह में बड़ी चुनौती बना है।
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जगदलपुर

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Laxmi Vishwakarma

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Updated: 10 Feb 2026, 5:38 PM IST

बस्तर के लिए सबसे बड़ा खतरा IED (photo source- Patrika)

बस्तर के लिए सबसे बड़ा खतरा IED (photo source- Patrika)

CG Naxal IED Update: बस्तर आज इतिहास के एक अहम मोड़ पर खड़ा है। दशकों तक नक्सल हिंसा की आग में झुलसने वाला यह इलाका अब नक्सलमुक्ति की दहलीज तक पहुंच चुका है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा 31 मार्च तक नक्सलवाद के खात्मे की तय डेडलाइन नज़दीक है और सुरक्षा बलों के आक्रामक अभियानों से नक्सल नेटवर्क लगभग ध्वस्त हो चुका है। लेकिन बंदूकें खामोश होने के बावजूद ज़मीन के नीचे छिपा एक अदृश्य दुश्मन-आईईडी-आज भी बस्तर के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। पुलिस अफसरों आकलन के मुताबिक, करीब 90 फीसदी नक्सली या तो मार जा चुके है या आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

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