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मेकाज में पथरी इलाज के लिए रखी लाखों की लिथोट्रिप्सी मशीन खा रही धूल, सीटी स्कैन भी कल से बंद

पथरी के इलाज के लिए मरीजों को जाना पड़ रहा बाहर, लिथोट्रिप्सी मशीन ऑपरेट करने मेडिकल कॉलेज को नहीं मिल रहा तकनीशियन

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मेकाज में पथरी इलाज के लिए रखी लाखों की लिथोट्रिप्सी मशीन खा रही धूल, सीटी स्कैन भी कल से बंद

मेकाज में पथरी इलाज के लिए रखी लाखों की लिथोट्रिप्सी मशीन खा रही धूल, सीटी स्कैन भी कल से बंद

जगदलपुर. मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रेडियोलॉजी विभाग में लाखों रुपए की लागत कीे लिथोट्रिप्सी मशीन की खरीदी की गई है, जो पिछले सालभर से यह मशीन शो-पीस बन कर रह गई है।

प्राइवेट अस्पताल में पथरी ऑपरेशन के लिए खर्च करना पड़ता है 30 से 50 हजार
मेडिकल कॉलेज में टेक्नीशियन के अभाव में किडनी में पथरी के उपचार के लिए खरीदी गई लिथोट्रिप्सी मशीन धूल खा रही है। पिछले सालभर से यह मशीन बंद पड़ी हुई है। इस मशीन से बिना चीरफाड़ किए आसानी से स्टोन को बाहर निकाला जा सकता है। लेकिन मशीन बंद होने की वजह से मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑपरेशन के लिए ३० से ५० हजार रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है। बावजूद मेकाज प्रबंधन टेक्नीशियन की भर्ती नहीं कर रहा है।

30 एमएम तक की पथरी निकाल सकते हैं
इस मशीन से किडनी स्टोन के मरीजों का बिना चीर फाड़ से ऑपरेशन किया जाता है। इस मशीन से 30 एमएम तक की पथरी को निकाला जा सकता है। इसमें मरीजों को भी दिक्कत नहीं होती है। यदि बाहर किडनी की पथरी का ऑपरेशन कराते हैं तो काफी खर्च होता है, वहीं मेडिकल कॉलेज में यह ऑपरेशन कम खर्च में और आयुष्मान कार्डधारियों का निशुल्क हो सकता है।

ऐसे काम करती है लिथोट्रिप्सी तकनीक
लिथोट्रिप्सी तकनीक से किडनी की पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोडऩे के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है। इन ध्वनि तरंगों को हाई एनर्जी शॉक वेव या तरंग भी कहा जाता है से पथरी को तोड़ा जाता है। इसके लिए लेजर तकनीक का उपयोग किया जाता है।