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ठंड के मौसम में बस्तर के आदिवासियों को बेहद पसंद है ये खाना, इम्युनिटी बढ़ाने में है फायदेमंद

Bastaria Diet: सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में ठंड बढ़ने के साथ ही सर्दी ज़ुकाम का खतरा भी ज्यादा रहता है। बस्तर क्षेत्र अपने खान-पान, पहनावा और रहन-सहन के लिए काफी प्रसिद्ध है। खाने की बात करें तो इसके लिए भी यह अन्य जगहों से बहुत भिन्न है। स्वाद के साथ ही यहां के आहार स्वास्थय के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।

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Bastaria Diet: सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में ठंड बढ़ने के साथ ही सर्दी ज़ुकाम का खतरा भी ज्यादा रहता है। बस्तर क्षेत्र अपने खान-पान, पहनावा और रहन-सहन के लिए काफी प्रसिद्ध है। खाने की बात करें तो इसके लिए भी यह अन्य जगहों से बहुत भिन्न है। स्वाद के साथ ही यहां के आहार स्वास्थय के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। तो चलिए आज हम आपको बताते हैं बस्तर क्षेत्र के कुछ प्रसिद्ध व्यंजनों के बारे में जो यहाँ के लोग सर्दियों के मौसम में खाते हैं। बस्तर में हरी-साग सब्जियों के साथ मांस का भी सेवन किया जाता है।

मांसाहारी भोजन
यहाँ मांसाहार की प्रचुरता है, बकरा, मुर्गा, मछली इत्यादि। अनेक समुदायों में सूअर पालने और उसका मांस खाने की भी प्रथा है। इसके अलावा यहाँ नशीले द्रव्यों का सेवन सामान्य है और सल्फी ,महुआ तथा लांदा को तरल भोजन माना जाता है। यहाँ रहने वाले लोग बरसात के मौसम में अनेक प्रकार की छोटी मछलियों और झींगों को पकड़कर इन्हें भूनकर फिर सहेजकर रख लेते हैं,जिन्हें वे सर्दियों के मौसम में खाते हैं।


शाकाहारी भोजन
बस्तर के आदिवासियों के आहार में प्राकृतिक रूप से उगने अथवा प्राप्त होने वाली सामग्री की प्रमुखता है। ये वे आहार सामग्रियां होती हैं जिन्हें उगाने अथवा उनकी खेती करने की आवश्यकता नहीं होती बल्कि बरसात और उसके बाद के मौसम में वे स्वतः ही उग आते हैं। जैसे अनेक प्रकार की पत्ता भाजियां , जमीन के नीचे उगने वाले कांदा, पुराने वृक्षों के आस पास उगने वाले फुटु आदि। लेकिन सर्दियों के मौसम में बरसात में उगने वाले इन्ही कांदा जैसी चीजों को भी आहार में शामिल किया जाता है।

फूल गोभी
बस्तर में फूल गोभी के ताजे हरे पत्ते भाजी के रूप में खाये जाते हैं। इनकी भुजिया छोंकी जाती है। हाट-बाजारों में इन पत्तियों की गड्डियां बनाकर बेचीं जाती हैं।

कुमड़ा भाजी: ठंड के मौसम में बस्तर में रहने वाले लोग बड़े चाव से कुमड़ा भाजी का सेवन करते हैं.

लाल भाजी
वर्ष भर मिलने वाली एक सब्जी है ,क्योंकि इसके पत्ते लाल रंग के होते हैं इसलिए इसे लाल भाजी कहते हैं। इसके पत्ते बस्तर में भाजी के रूप में खाये जाते हैं। इनकी भुजिया छोंकी जाती है। इन पत्तियों की ढेरियां बनाकर बेचीं जाती हैं।

खट्टा भाजी
यह भाजी बरसात के साथ ही हर मौसम में मिलती है क्योकि यह स्वतः भी उगती है और इसे उगाया भी जाता है। यह एक झाड़ी नुमा पौधे के रूप में उगती है और इस पौधे का प्रत्येक अंग उपयोगी होता है। इसके पत्ते बस्तर में भाजी के रूप में खाये जाते हैं। इनकी भुजिया छोंकी जाती है। इसके लाल रंग के फूल टमाटर की तरह खट्टे होते है ,इन्हे चटनी या सब्जी में मिलकर पकने से सब्जी का स्वाद बढ़ जाता है। इन फूलों को सुखाकर रख लिया जाता है और गर्मियों के मौसम में उपयोग में लाया जाता है। इसके बीज से तेल निकला जाता है। बीज सुखाकर उसके पावडर का प्रयोग गर्मी लग जाने पर औषधि के रूप में किया जाता है। इसके डंठल के छिलके से रस्सी बनाई जाती है।

कांदा
कांदा जमीन के नीचे उगते हैं, इसकी अनेक प्रजातियां बस्तर में पाई जाती हैं। यह कई आकर और माप के होते हैं। कुछ कांदे कड़वे और बेस्वाद होते हैं जबकि कुछ खाने में स्वादिष्ट और पोषक होते हैं। इन्हे कच्चा उबालकर या भून कर खाया जाता है।

केयू कांदा
केयू कांदा देखने में बड़े अदरक जैसा लगता है। इसकी सब्जी पकाकर खाई जाती हैं।

कोचई कांदा
प्राकृतिक तौर पर जमीन के नीचे उगता है। इसकी सब्जी पकाकर खाई जाती हैं।

कुमड़ा
कद्दू प्रजाति के फलों को बस्तर में कुमड़ा कहते हैं। यह अनेक प्रकार के होते हैं जैसे पेठा बनाने के लिए प्रयुक्त होने वाला सफ़ेद कद्दू जिसे रखिआ कुमड़ा कहा जाता है। सामान्य पीला कद्दू जिसे मीठा कुमड़ा कहते हैं। हरा कद्दू जिसे हरा कुमड़ा कहा जाता है। इन्हे पका कर भय जाता है। इन्हे कद्दूकस करके उड़द दाल के साथ पीसकर वड़ियाँ बनाई जाती हैं।

बीज
बस्तर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की फलियों के बीज निकालकर उनको सब्जी की भांति पकाकर खाने का प्रचलन है। इनमे सेम और बरबटी के बीज बहुत लोकप्रिय हैं।

वड़ियाँ
बस्तर के लोग अनेक प्रकार की वड़ियाँ बनाते हैं। उड़द की दाल को भिगोकर , उसका छिलका निकाल कर , उसे पीसकर उसके पेस्ट से वड़ियाँ बनाई जाती हैं। यह वड़ियाँ अकार में बड़ी और भारी होती हैं। इनकी पौष्टिकता बढ़ाने के लिए उड़द की दाल के पेस्ट में कुमड़ा , पपीता , लौकी आदि के गूदे का पेस्ट मिला दिया जाता है।

रखिया बड़ी
रखिया, कददू प्रजाति का एक फल होता है जिसे लोग घर की बाड़ी में उगते हैं। इसका छिलका निकालकर, इसका कददूकस करके बारीक पेस्ट बना लेते हैं। अब उड़द की दाल को भिगोकर पीस लेते हैं और इसमें रखिया का पेस्ट मिलकर उसकी बड़ियाँ बनाकर सुखा लेते हैं। यह बड़ी , सब्जी की तरह पकाकर खाई जाती हैं।

नक्खी बड़ी
उड़द दाल की बड़ियाँ, नक्खी बड़ी कहलाती हैं। उड़द की दाल को भिगोकर पीस लेते हैं और उसकी बड़ियाँ बनाकर सुखा लेते हैं। यह बड़ी, सब्जी की तरह पकाकर खाई जाती हैं।