जगदलपुर

बस्तर में ट्रॉमा का ड्रामा

- तीन साल में दो बार सीएम व डिप्टी सीएम के हाथों भूमिपूजन...फिर भी ट्रॉमा सेंटर नहीं- सीएम का वादा भी साबित हुआ जुमला,- भूमिपूजन के चार साल बाद भी मेकाज में तैयार होने वाला संभाग का पहला ट्रॉमा सेंटर अधूरा।- कोरोना ने रोक रखा था काम, लहर खत्म होने के बाद भी अब तक नहीं शुरू हुआ है काम।- गंभीर मामले में लगानी पड़ती है 500 किलोमीटर की दौड़- जान गवा कर चुका नहीं पड़ती है इसकी कीमत

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Sep 04, 2023
बस्तर में ट्रॉमा का ड्रामा

जगदलपुर. बस्तर के मेडिकल कॉलेज में बनने वाले ट्रॉमा सेंटर को लेकर ड्रामा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। तीन साल में इस ट्रॉमा सेंटर के लिए दो बार बड़े आयोजन हो चुके हैं लेकिन अब तक ट्रॉमा सेंटर का पता नहीं है। ऐसा नहीं है कि इसके लिए स्थानीय स्तर के अधिकारियों ने शुभारंभ या भूमिपूजन किया हो। बल्कि इसका शुभारंभ सबसे पहले सीएम के हाथों वर्ष २०२० में जुलाई माह में की गई थी। लेकिन इसके बाद भी इसकी शुरूआत नहीं हो सकी। इतना ही नहीं वर्ष २०२२ में नए तरीके से इसकी शुरूआत के लिए भूमिपूजन किया गया। लेकिन इसका भी नतीजा अब तक सिफर ही है। लोगों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ऐसे चला ट्रॉमा का ड्रामा
सीएम ने वर्ष २०२० में जब इसका शुभारंभ किया तो यहां का कार्य अधूरा था। दावा किया गया कि एक महीने के अंदर सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। जबकि इसके १० महीने बाद तक यहां डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी। इसके बाद जब यह प्रक्रिया शुरू हुई तो कोरोना आ गया और प्रबंधन ने इसे कोविड केयर सेंटर बना दिया। जब कोरोना की लहर खत्म हुई तो ट्रॉमा सेंटर अलग से बनाने को कहा गया। जिसके बाद सितंरब २०२२ में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने इसका भूमिपूजन किया।

तीन साल में मेकाज के ही ट्रॉमा सेंटर के लिए दो बार में साढ़े १० स्वीकृत
मेकाज में ट्रॉमा सेंटर के लिए चार साल में सरकार ने दो बार बड़े आयोजन कर इसकी शुरूआत करनी चाही। लेकिन अब तक इसका अता पता मेकाज में नहीं है। सबसे पहले सीएम ने वर्ष २०२० में जब इसके शुभारंभ की बात कही थी उस वक्त यहां ९ करोड़ की लागत बताई थी। जब कोरोना की लहर खत्म हुई तो ट्रॉमा सेंटर अलग से बनाने को कहा गया। जिसके बाद सितंबर २०२२ में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने इसका भूमिपूजन किया। जिसकी कीमत डेढ़ करोड़ की लागात रखी गई। लेकिन इसके बाद भी अब तक इस सेवा का कोई अता पता नहीं है।

ऐसे मामलों में रेफर सेंटर बनकर रह गया मेकाज
करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद मेडिकल कॉलेज गंभीर मरीजों के लिए सिर्फ रेफर सेंटर बनकर रह गई है। मेडिकल कॉलेज में पूरे बस्तर संभाग के अस्पताल से गंभीर मरीजों को रेफर किया जाता है। बावजूद यहां पर इलाज की सुविधा नहीं है। सडक़ दुर्घटना या किसी अन्य हादसे में घायल मरीजों को जब परिवार वाले उम्मीद से यहां लाते हैं तो उन्हें मायूस होना पड़ता है। साथ ही उनका गोल्डन टाइम भी कम होता जाता है। इसलिए जानकार परिवार ऐसे मामलों में सीधे ही रायपुर, हैदराबाद व विशाखापटनम लेकर चले जाते हैं। वहीं गरीब परिवार यहां के इलाज पर भगवान के भरोसे बैठे रहते हैं।

वर्सन : अधीक्ष बोले ७० प्रतिशत काम पूरा
दरअसल मेकाज में जो ट्रॉमा सेंटर तैयार किया जा रहा है वह २० बेड का है। दावा किया जा रहा है कि दो आधुनिक ओटी भी तैयार हो रही है। यहां सिर से लेकर पैर के नाखुन तक के ऑपरेशन की सुविधा मरीजों को मिलेगी। न्यूरो सर्जन सर का तो अन्य डॉक्टर शरीर के बाकि हिस्सों का इलाज करेंगे। अभी ७० प्रतिशत इसका काम पूरा हो चुका है। जल्द ही यह बनकर तैयार हो जाएगा।

फैक्ट फाइल
- जुलाई २०२० को सीएम ने मेकाज में किया था ट्रॉमा सेंटर का शुभारंभ
- सितंबर २०२१ को इसमें न्यूरोसर्जन समेत अन्य पदों के लिए निकाली गई नियुक्तियां
- कोरोना के चलते ट्रॉमा सेंटर का काम रोककर इसे कोविड केयर सेंटर बना दिया गया
- १५ सितंबर २०२२ को स्वास्थ्य मंत्री और मौजूदा डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने मेकाज में ही नए ट्रॉमा सेंटर के लिए भूमिपूजन किया।
- सितंबर २०२३ तक यहां ट्रॉमा सेंटर की सुविधा नहीं है।

Published on:
04 Sept 2023 09:42 pm
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