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बाहरी दुनिया से महरूम, घोर माओवादी प्रभावित इलाके की आदिवासी महिलाओं ने जब पहली बार हाथों में लगाई मेहंदी

सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम में मेहंदी प्रतियोगिता का हुआ आयोजन, कोडोली-नरिया स्कूल प्रबंधन समिति ने कराया था आयोजन

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बाहरी दुनिया से महरूम, घोर माओवादी प्रभावित इलाके की आदिवासी महिलाओं ने जब पहली बार हाथों में लगाई मेहंदी

बाहरी दुनिया से महरूम, घोर माओवादी प्रभावित इलाके की आदिवासी महिलाओं ने जब पहली बार हाथों में लगाई मेहंदी

नारायणपुर. घोर माओवादी प्रभावित इलाके में निवासरत आदिवासी महिलाएं अपने पारिवारिक जीवन में व्यस्त होने के कारण बाहरी दूनिया से महरूम बनी रहती है। इससे आधूनिक युग में होने वाली गतिविधियों की जानकारी दूरस्थ अंचल की महिलाओं को नहीं मिल पाती है।

पहली बार मेहंदी प्रतियोगिता आयोजित
इन महिलाओं को बाहरी दुनिया में होने वाली गतिविधियों के बारे में अवगत कराने के लिए नरिया-कोडोली शाला विकास प्रबंधन समिति ने सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम के तहत ज्ञान ज्योति प्राथमिक शाला में पहली बार मेहंदी प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में ग्राम के समस्त बुजुर्ग महिला एवं युवतियों ने हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डूंगी बाई, अध्यक्ष श्रीमती गौरसे बाई और विशेष अतिथि श्रीमती सकारो बाई उपस्थिति थी।

70 साल की उम्र्र में पहली बार मेरे हाथों में मेहंदी लगी
इस प्रतियोगिता में सते बाई प्रथम एंव बजाय बाई ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इन महिलाओं को शाला प्रबंधन विकास समिति द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए। दूरस्थ अंचल के ग्रामीण इलाके में इस प्रकार की प्रतियोगिता का आयोजन पहली बार होने के कारण महिलाओं में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा था। इस अवसर पर श्रीमती डूंगी बाई ने बताया कि 70 साल की उम्र्र में पहली बार मेरे हाथों में मेहंदी लगी है। इस प्रतियोगिता के सफल आयोजन में ज्ञान ज्योति प्राथमिक शाला कोडोली के प्रधान अध्यापक देवेंद्र देवांगन, अतिथि शिक्षक मनोज यादव, अर्जुन, चमरु, विसरू, कजाराम, ग्राम पटेल सहित समस्त ग्रामवासियों का योगदान रहा।