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हां है हम बस्तर के आदिवासी, हमें भी मालूम है कोरोना का वार, और उसके लिए बनाया है हमने देशी हथियार

सरकारी सुविधाओं के अभाव में तेजी से फैल रही कोरोना महामारी को हराने बस्तर के आदिवासी कर रहे ऐसे अनोखे उपाय

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हां है हम बस्तर के आदिवासी, हमें भी मालूम है कोरोना का वार, और उसके लिए बनाया है हमने देशी हथियार

हां है हम बस्तर के आदिवासी, हमें भी मालूम है कोरोना का वार, और उसके लिए बनाया है हमने देशी हथियार

जगदलपुर. बस्तर के आदिवासी भी अब इस वैश्विक बीमारी से अनजान नहीं है जहां ये बीमारी लगभग पूरे विश्व में तेजी से फैल रहा है वहीं बस्तर संभाग से अभी तक ये बीमारी अछूता है। लेकिन इस महामारी से लड़ने के लिए हम बस्तरवासी अभी से तैयार है और हमारा हथियार भी।

कोरोना से लड़ने हथियार इजात किया
पूरे देश सहित बस्तर संभाग के अंदरूनी इलाकों में ये खबर फैल गई है जिससे ग्रामीण भी अब इससे बचाव के उपाय करने लगे हैं। जिस तरह शासन की सारी सुविधाएं शहरी इलाकों में सहीं समय पर मिल रही हैं। वहीं ग्रामीण इलाकों के लोग इन सुविधाओं से वंचित हैं। इसलिए उन्होंने अपने लिए कोरोना से लड़ने हथियार इजात किया है जिससे वो कोरोना से खूद का बचाव कर रहे हैं।

यह तस्वीर बस्तर संभाग के अंदरूनी इलाकों के हैं जहां सरपंच एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के समझाइश के बाद ग्रामीणों ने ये देशी मास्क इजात कर पहना है। वहीं ये दूसरे ग्रामीणों को भी इसकी समझाइश दे रहे हैं।