
छिंदबहार के लुकुपखना में जुटते हैं हजारों शिव भक्त
जगदलपुर. लोहंडीगुड़ा से लगभग १२ किमी दूर स्थित छिंदबहार के पहाड़ी पर स्थित शिव मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर यहाँ मेला जुटता है । लुकु पखना के नाम से प्रचारित इस शिव मंदिर में लोगों की प्राचीन समय से आस्था जुड़ी हुई है। यही वजह है कि इस स्थान पर बस्तर के अलावा अन्य जिलों से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। करीब दो वर्ष तक कोरोना संक्रमण के चलते मंदिरों में शिव आराधना नहीं हो पाई थी। इसी के चलते इस वर्ष कोरोना लहर के कमजोर पड़ते ही श्रद्धालुओं में महाशिवरात्रि पर भारी उत्साह देखा गया।
लुकुपखना शिव मंदिर की प्रचीन मान्यता
बताया जाता है कि छिंदबहार गाँव से लगे पहाड़ी पर लुकु पखना नाम दिया गया है। इस स्थान पर वर्षो पूर्व छोटा सा शिवलिंग था जिसकी ग्रामीण पूजा किया करते थें। आसपास के ग्रामीणों में मान्यता है कि इस स्थान पर जो भी मनोकामना के साथ पूजा करते हैं वह पूरी होती है। लोग अपनी मनोकामना एक चिटठी में लिखकर शिवलिंग के त्रिशूल में बांधकर चले जाते हैं। मनोकामना पूरी होते ही लोग यहाँ पर नंदी की मिटटी की प्रतिमा चढाते हैं। यही वजह है कि आज इस स्थान पर शिवमंदिर का निर्माण कर महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है।
बारहमासी पानी का झरना
ग्रामीणों के मुताबिक इस मंदिर के समीप उपर पहाड़ी से पानी का झरना रिसता रहता है। यह जलस्त्रोत बारहमाह बहता रहता है। इसके पानी के कुंड से भक्त यथा संभव स् नान कर मंदिर में प्रवेश करते है। जहाँ तक मान्यता है कि इस मंदिर में भक्तों की मनोकामना पूर्ण होने की आस्था के चलते लुकु पखना नामक इस स्थान पर शिव मंदिर में प्रति सोमवार भी लोग जुटतें हैं।
Published on:
01 Mar 2022 08:39 pm
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