
श्रीगंगानगर। धर्म के नाम पर समाज को बांटने वालों के लिए एक मासूम सी मुस्लिम बच्ची ने तमाचा मारा है। श्रीगंगानगर के रायसिंहनगर की यह बच्ची मुस्लिम समुदाय से होने के बावजूद राजस्थानी में बालाजी के भजन गा रही है। ग्यारह साल की मासूम बच्ची भले ही मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती है लेकिन उसकी कला ने धर्म के नाम पर बने सामाजिक बंधनों के दायरों को लांघते हुए राजस्थानी में बालाजी का भजन गाया है।
जिला मुख्यालय की महक मीर छठी कक्षा में पढ़ती है। वाहन चलाकर अपने परिवार का गुजर बसर करने वाले सिकंदर खान ने अपने घर में ही पल रही प्रतिभा को पहचाना तो उसने भी धर्म के सभी मिथक तोड़ डालने की ठान ली तथा बच्ची की प्रतिभा को आगे बढाते हुए उचित मंच दिया।
घर से स्पोर्ट मिली तो बच्ची ने अपनी अपनी प्रतिभा को लोगों के सामने रखा। परिवार को खुशी उस वक्त मिली जब महक मीर को अपनी जिन्दगी का पहले गीत के रुप में बालाजी का भजन गाने को मिला। इससे भी बड़ी खुशी तब मिली जब वही भजन उसे राजस्थानी में गाने का मौका मिला।
महक को भी इस बात की खुशी है कि उसकी प्रतिभा ***** व मुस्लिम समुदाय के बीच सेतु बनकर सामने आई। महक मीर की प्रतिभा के चर्चे मुस्लिम समाज में भी इस कदर फैले कि लूणकरणसर में मुस्लिम समाज के लोग आगामी पूर्णिमा को बालाजी का जागरण रख दिया। इस जागरण में लीड सिंगर के रुप में महक अपने अंदाज में बालाजी के भजन गाएगी। महक पत्रिका से रुबरु हुई तो छठी कक्षा की बच्ची होने के बावजूद एक पारंगत सिंगर के रुप में।
वह अपनी मम्मी अलीशा खान व पापा सिकंदर खान को अपना मार्गदर्शक मानती है तो उसको लांच करने वाले कमल चौधरी को अपना आदर्श मानती है। म्यूजिक कंपनी के प्रबंधक हितेश शर्मा ने बताया कि महक मीर का भजन मां म्हाने तैयार कर दे को प्रथम नवरात्रा पर लांच किया जाएगा। शीघ्र ही राजस्थानी में ही खाटू श्याम जी पर भी महक का भजन लांच किया जाएगा।
Updated on:
21 Sept 2017 07:07 pm
Published on:
21 Sept 2017 05:28 pm

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