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2050 तक दुनियाभर में उभरेंगी 14 और Megacities

रिपोर्ट : दिल्ली बन जाएगा विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला शहर

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जयपुर

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Aryan Sharma

Jan 22, 2023

2050 तक दुनियाभर में उभरेंगी 14 और Megacities

2050 तक दुनियाभर में उभरेंगी 14 और Megacities

सिडनी. दुनिया की 70 फीसदी आबादी (Population) की रिहायश वर्ष 2050 तक शहरों में होगी। 2020 में यह तादाद 54 प्रतिशत थी। इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (Institute for Economics & Peace) की रिपोर्ट के अनुसार, जनसंख्या में वृद्धि और तेजी से बढ़ता शहरीकरण इसके प्रमुख कारण होंगे। इस चलन से विश्व में मेगासिटी (एक करोड़ से ज्यादा आबादी वाला शहर) की संख्या बढ़ेगी। दुनियाभर में वर्तमान में टोक्यो, दिल्ली और शंघाई सहित 33 मेगासिटीज (Megacities) हैं। करीब तीन दशक बाद 21.3 करोड़ की कुल बढ़ी हुई आबादी के साथ 14 और शहर मेगासिटीज की सूची में शामिल होंगे, जिसके बाद दिल्ली दुनिया का सर्वाधिक आबादी वाला शहर होगा।

बेंगलूरु की जीडीपी में वृद्धि की संभावना
वर्ष 2050 तक जो मेगासिटी उभरेंगी, उनमें तीन भारतीय शहर सूरत, अहमदाबाद और पुणे सहित लंदन, बगदाद, तेहरान आदि शामिल होंगे। एक्सा (AXA) आइएम कॉर्पोरेट की रिपोर्ट के अनुसार, इनमें लोगों की संख्या में वृद्धि के अलावा देश का भी आर्थिक विकास होगा। जैसे फिलीपींस में मनीला और भारत में बेंगलूरु में दशक के अंत तक जीडीपी में 150 फीसदी के लगभग वृद्धि होने की संभावना है।

ये होंगी अगली मेगासिटी

रूसी-जापानी शहरों की घटेगी आबादी
लगभग तीन दशक के बाद सिर्फ तीन महानगरों की आबादी में ही गिरावट आएगी, जिसमें रूस का मॉस्को (-3%), जापान का टोक्यो और ओसाका (दोनों में -12%) शामिल हैं। उम्रदराज होती आबादी और घटती जन्म दर के कारण टोक्यो के सिकुड़ने के बावजूद भी यह शहर 2050 में दुनिया की चौथी सबसे अधिक आबादी वाली मेगासिटी के रूप में रैंक करेगा। हालांकि सदी के अंत तक वैश्विक जनसंख्या में कमी आने लगेगी, लेकिन अफ्रीका एकमात्र ऐसा क्षेत्र होगा, जहां आबादी में वृद्धि जारी रहेगी।

कई चुनौतियां का करना होगा सामना
मेगासिटी बनने वाले शहरों की सरकारों के सामने कई प्रकार की चुनौतियां होंगी, क्योंकि इनमें से आठ में पारिस्थितिक खतरों जैसे प्रदूषण आदि का स्तर उच्च और शांति का स्तर निम्न है। कम शांति वाले देशों की मेगासिटीज में सबसे अधिक जनसंख्या वृद्धि दर है। इन शहरों में मुकाबला करने की क्षमता कम है और इन्हें संभावित रूप से नौकरी, सुरक्षा प्रदान करने और अपने पारिस्थितिक खतरों का प्रबंधन करने के लिए संघर्ष करना होगा।