
जयपुर
हेलमेट सर पर होगा तो ही अपने दुपहिया में पेट्रोल डलवा सकेंगे। यह बात जयपुर शहर में बेमानी सी दिखती है। कुछ जगह इस नियम का पालन सख्ती से किया गया तो फायदा हुआ लेकिन हमारे शहर में शायद इसके बारे में सभी भूल गए। हेलमेट की अनदेखी दुपहिया सवारों के लिए मौत का बड़ा सबब बन रही है।
लापरवाही ले रही जान
बीकानेर ... ना पुलिस ना प्रशासन कोई नहीं दे रहा ध्यान। 2015 में &14 सडक़ हादसों में 117 लोगों की तो मौत हो गई, 487 घायल हुए। वर्ष 2016 में 291 बाइक हादसों में 96 लोगों की मौत। हर माह बाइक से जुड़े हादसों के 180 से 200 घायल ट्रोमा सेंटर पहुंचते हैं। ट्रोमा सेंटर में हर माह 8 से 9 लोगों की मौत होती है।
बांसवाड़ा... बिना हेलमेट पेट्रोल दिया जा रहा है। हेलमेट की अनदेखी के कारण वर्ष 2015 में &78 सडक़ हादसों में 182 लोगों की जान गई, 496 घायल हुए। वर्ष 2016 में &82 सडक़ हादसों में 190 लोगों की मौत हो गई, 462 लोग घायल हुए।
डूंगरपुर... हेलमेट की अनदेखी के कारण हर साल सडक़ हादसों में औसतन 150 लोगों की मौत होती है। इनमें 70 फीसदी दोपहिया वाहन सवार होते हैं।
यहां ऐसा भी हुआ
कोटा
पम्पों पर हेलमेट होने पर ही पेट्रोल देने की अनिवार्यता & साल पहले लागू हुई थी लेकिन पालना अब तक नहीं हुई। जबकि कोटा में सिर में चोट के कारण हर साल करीब 50 लोगों की मौत हो रही है। हालांकि हेलमेट की अनिवार्यता लागू होने से हादसों में करीब 16 प्रतिशत की कमी आई है।
सीकर
जनवरी 2017 में महज एक दिन के लिए अनिवार्यता लागू रही। इसके बाद पेट्रोल पंप संचालकों ने आंदोलन किया और सरकार ने 3 महीने की छूट दे दी। बाद में यह दोबारा लागू हो ही नहीं पाई। जबकि सिर में चोट के कारण हर साल औसतन 470 से अधिक लोगों की मौत होती है।
यह है रा’य में विभिन्न शहरों का हाल
पाली... हेलमेट होने पर ही पेट्रोल देने की अनिवार्यता लागू है, इसीलिए हर साल दुपहिया सवारों की मौतों का आंकड़ा घटकर औसतन 100 पर आ गया है। पहले यह आंकड़ा कहीं अधिक था।
बारां... पम्पों पर पेट्रोल तो बिना हेलमेट भी दिया जा रहा है लेकिन जांच के चलते जून तक हादसे 11 प्रतिशत घटे हैं। सिर में चोट के कारण यहां हर साल औसतन 80 दुपहिया सवारों की मौत होती है।
उदयपुर... पेट्रोल के लिए हेलमेट की अनिवार्यता लागू नहीं हो पाई। अभियान के नाम पर हर थोड़े अंतराल पर चालान काटे जाते हैं लेकिन लगातार सख्ती का अभाव है। यहां हर साल &0 से ’यादा मौतें होती हैं।
आंकड़े गवाह
लागू हुआ हेलमेट तो घटी मौतें...
450 दुपहिया
वाहन चालकों की मौत, जयपुर में हर साल औसतन, इनमें से 70-80 चालक होते हैं बिना हेलमेट
200 दुपहिया
वाहन चालक सिर की चोट के कारण मरते हैं हर साल जयपुर में 450 में से
600 से अधिक
मौत होती थी जयपुर में हेलमेट लागू होने से पहले हर साल
मौत होती थी जयपुर में हेलमेट लागू होने से पहले हर साल
में लागू हुई थी जयपुर में दुपहिया चालक पर हेलमेट की अनिवार्यता
Updated on:
8 Oct 2017, 9:35 AM IST
Published on:
8 Oct 2017, 9:33 AM IST
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