
27 October 2020 Papankusha Ekadashi Padmanabhaswamy Mandir
जयपुर. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पापांकुशा कही जाती है। अपने पापों पर अंकुश लगाए रखने में इस व्रत का पुण्य लाभ अहम होता है। इसी कारण एकादशी का नामकरण पापाकुंशा एकादशी हुआ। इस दिन मौन रहकर विष्णुजी की पूजापाठ तथा भजन-कीर्तन करने का विधान है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से अश्वमेघ और सूर्य यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इस व्रत में सात तरह के अनाज, गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर की दाल की पूजा की जाती है। एकादशी तिथि पर स्नान आदि के बाद व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए।
इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ जरूर करना चाहिए। व्रत के अगले दिन द्वादशी पर जरूरतमंदों को भोजन और अन्न का दान करने के बाद व्रत पारण करना चाहिए। पापाकुंशा एकादशी पर व्रत रखनेवालों को कथा जरूर सुनना चाहिए।
पापांकुशा एकादशी व्रत—पूजा मुहूर्त
एकादशी तिथि का प्रारंभ 26 अक्टूबर को सुबह 09 बजे से
एकादशी तिथि का समापन 27 अक्टूब को सुबह 10 बजकर 46 मिनट पर
पापांकुशा एकादशी पारणा मुहूर्त 28 अक्टूबर को सुबह 06:30:35 से 08:44:14 तक
Published on:
27 Oct 2020 07:30 am
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