मंत्रालय ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखा पत्रराजस्थान को मिल सकते हैं 1714 हेल्थ वर्कर
सीकर. कोरोना से चल रही जंग में अब हेल्थ वर्कर भी योद्धा बनकर मैदान में उतरेंगे। यदि देश के सभी राज्यों ने इस पैटर्न को अपनाया तो आगामी पांच दिन में देश को लगभग 44 हजार हेल्थ वर्कर्स की फौज मिलेगी। इस संबंध में ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है। पत्र में बताया कि केन्द्र सरकार की ओर से सभी राज्यों में स्किल डवलपमेंट के जरिए हेल्थ वर्कर की एक बड़ी टीम देशभर में तैयार है। उन्होंने माना कि इस युद्ध में चिकित्सकों का साथ देने के लिए भी एक टीम चाहिए। इस संबंध में मंत्रालय की ओर से जल्द सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से वीसी के जरिए चर्चा भी की जाएगी।
वर्कर्स के नाम व मोबाइल नंबर भी दिए
मंत्रालय ने सभी राज्यों को हेल्थ वर्कर की सूची भी सौंपी है। इसमें हेल्थ वर्कर के नाम व मोबाइल नंबर की भी सूची है। सभी जिलों के कलक्टरों को यह सूची भेजी जा रही है। कलक्टर अपने जिले की स्थिति के हिसाब से हेल्थ वर्कर्स की सेवाएं ले सकेंगे।
छह महीने से एक साल का प्रशिक्षण
ग्रामीण विकास विभाग व स्किल इंडिया की ओर से देशभर में 30 हजार से अधिक स्किल डवलपमेंट सेंटर्स का संचालन किया जाता है। इसमें लगभग 295 से अधिक तरह की ट्रेड में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। कोरोना के युद्ध में उतरने वाले हेल्थ वर्कर ने छह महीने से एक साल का प्रशिक्षण लिया हुआ है।
किस राज्य में कितने हेल्थ वर्कर
राजस्थान: 1714
आन्ध्रप्रदेश: 3508
अरुणाचल प्रदेश: 27
असम: 3040
छत्तीसगढ़: 1674
गुजरात: 808
हरियाणा: 402
हिमाचल प्रदेश: 832
जम्मू-कश्मीर: 994
झारखंड: 1939
मध्यप्रदेश: 1580
महाराष्ट्र: 2575
पंजाब: 563
उत्तरप्रदेश: 3736
उत्तराखंड: 390
मरीजों की सेवा करना फर्ज, कोई डर नहीं
बालोतरा. विश्व महामारी कोरोना रोकथाम व नियंत्रण कार्य में चिकित्सक, नर्सिंग स्टॉफ, समाजसेवी जी-जान से जुटे हुए हैं। स्वयं की परवाह किए बगैर मरीजों का उपचार कर रहे तो उन तक पहुंच उनकी मदद कर रहे हंै। बालोतरा के वरिष्ठ शिशु रोग चिकित्सक कमल मूंदड़ा ने बताया कि मरीजों की सेवा करने में उन्हें खुशी मिलती है, यह उनका धर्म व कत्र्तव्य है। पत्नी उमा मंूदड़ा, पुत्र प्रतिक ने महामारी के इन दिनों में उनका उत्साह बढ़ाया, एक बार भी नहीं कहा कि स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए अवकाश लेकर घर में रहें। वे प्रतिदिन 50 से 60 मरीज देखते हैं। वार्ड का निरीक्षण कर भर्ती मरीजों का उपचार करते हैं। आपातकालीन सेवाएं देने भी पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पुत्री पूर्वा मंूदड़ा, उदयपुर मेडिकल कॉलेज की छात्रा है। उसका अंतिम वर्ष है। महामारी में जरूरत पडऩे पर वह भी अनुभव आधार पर सेवाएं देंगी, । इसके लिए उन्हें बड़ी खुशी होगी।
- डॉ. कमल मंूदड़ा, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक