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सरकार का एक ऐसा आदेश, 90 प्रतिशत दवा दुकानों पर लटकी तलवार

राजस्थान में करीब 90 प्रतिशत दवा दुकानें गैर-व्यावसायिक या आवासीय क्षेत्रों में संचालित हो रही हैं। यहां तक कि अधिकांश अस्पताल परिसरों में स्थित मेडिकल स्टोर भी औपचारिक रूप से व्यावसायिक क्षेत्र में नहीं आते। जयपुर शहर के कई बड़े इलाकों में भी आज तक भूमि उपयोग को पूर्ण रूप से व्यावसायिक घोषित नहीं किया गया है।

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जयपुर

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Vikas Jain

Jan 07, 2026

जयपुर। प्रदेश में नई औषधि लाइसेंसऔर पुराने लाइसेंसों के नवीनीकरण को लेकर प्रस्तावित व्यवस्था का राजधानी के दवा कारोबारियों ने विरोध किया है। राजधानी केमिस्ट एसोसिएशन की ओर से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर को ज्ञापन सौंपकर कहा गया है कि औषधि एवं प्रसाधन अधिनियमके तहत लाइसेंस से जुड़े प्रावधानों में बदलाव करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है, राज्य स्तर पर इस तरह की शर्तें लागू करना विधिसम्मत नहीं है।

ज्ञापन में विशेष रूप से उस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई गई है, जिसमें नए औषधि लाइसेंस जारी करने और पुराने लाइसेंसों के नवीनीकरण के लिए दुकान का व्यावसायिक क्षेत्र में होना, व्यापारिक पंजीकरण और पैन कार्ड जैसी शर्तों को अनिवार्य बताया गया है। केमिस्टों का कहना है कि इससे प्रदेशभर में दवा आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होगी।

90 प्रतिशत दुकानें गैर-व्यावसायिक इलाकों में

एसोसिएशन के अनुसार राजस्थान में करीब 90 प्रतिशत दवा दुकानें गैर-व्यावसायिक या आवासीय क्षेत्रों में संचालित हो रही हैं। यहां तक कि अधिकांश अस्पताल परिसरों में स्थित मेडिकल स्टोर भी औपचारिक रूप से व्यावसायिक क्षेत्र में नहीं आते। जयपुर शहर के कई बड़े इलाकों में भी आज तक भूमि उपयोग को पूर्ण रूप से व्यावसायिक घोषित नहीं किया गया है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकार ने नर्सिंग होम को आवासीय क्षेत्रों में संचालित करने की अनुमति दे रखी है और स्वाभाविक रूप से उनके साथ जुड़ी दवा दुकानें भी वहीं स्थित हैं। ऐसे में केवल व्यावसायिक परिसर की शर्त लागू होने से बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर तकनीकी रूप से अवैध हो जाएंगे।

आमजन की दवा तक पहुंच होगी मुश्किल

केमिस्टों ने चेतावनी दी है कि यदि नई व्यवस्था को यथावत लागू किया गया तो दवा दुकानों का नवीनीकरण रुक जाएगा, जिससे मरीजों को डॉक्टर की ओर से लिखी दवाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाएंगी। इसका सीधा असर जनस्वास्थ्य पर पड़ेगा और प्रधानमंत्री जन औषधि योजना जैसी योजनाओं की पहुंच भी प्रभावित होगी। एसोसिएशन ने मंत्री से मांग की है कि इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर इसे केंद्र सरकार के अधिसूचित नियमों के अनुरूप ही लागू किया जाए, ताकि दवा कारोबार के साथ-साथ आम जनता के हित सुरक्षित रह सकें