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जयपुर आर्ट वीक में दिखाई प्रेम कहानी, विरासत और आधुनिकता का संगम

डमरू बजाकर बोलते थे तमाशा देखिए, तमाशा देखिए, बस यहीं से मुझे आइडिया आया कि मैं भी बायोस्कोप के जरिए फिल्मी कहानी को लोगों तक लेकर जाऊं। यह कहना है स्टोरीटेलर विनायक मेहता का, जिन्होंने गोलेछा सिनेमा में 'टुगेदर थ्रू द सिनेमा' पर संवाद किया।

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jaipur art week

जयपुर। 1960 के दशक में बायोस्कोप मनोरंजन का जरिया होते थे। वुलन कार्ट में लोग बायोस्कोप लेकर इधर—उधर घूमते थे। डमरू बजाकर बोलते थे तमाशा देखिए, तमाशा देखिए, बस यहीं से मुझे आइडिया आया कि मैं भी बायोस्कोप के जरिए फिल्मी कहानी को लोगों तक लेकर जाऊं। यह कहना है स्टोरीटेलर विनायक मेहता का, जिन्होंने गोलेछा सिनेमा में 'टुगेदर थ्रू द सिनेमा' पर संवाद किया। राजस्थान पत्रिका के सपोर्ट से आयोजित जयपुर आर्ट वीक में कई आयोजन हुए।

इसके तहत उन्होंने बताया कि उनकी फिल्म सिर्फ एक मिनट की है, जिसका नाम 'मिलन' है। इसमें उन्होंने बायोस्कोप के जरिए नायक और नायिका की फीलिंग्स को एक साथ दिखाया है। वे कहते हैं कि लोग अब तीन घंटे की मूवी की जगह रील्स देखना ज्यादा पसंद करते हैं, इसीलिए शॉर्ट मूवी के जरिए प्रेम कहानी को दर्शाने का प्रयास किया है। टिकट की कीमत भी पहले की तरह दो रुपए ही रखी है।

बिना जलाए झिलमिलाने लगी मोमबत्तियां

अल्बर्ट हॉल पर ईरानी कलाकार अरज़ू जरगर की 'हार्मनी गैलेक्सी' थीम वॉक थ्रू हुई। इसमें कलाकार अरजू जरगर ने बताया कि हार्मनी गैलेक्सी सिरेमिक इंस्टॉलेशन है, जिसमें 1727 बिना जली गुलाबी रंग की मोमबत्तियां है, जो जयपुर के स्थापना वर्ष से प्रेरित हैं। यह कृति साझा धरोहर और कहानी कहने का उत्सव है। हर एक मोमबत्ती अपनी झिलमिलाती चमक के साथ सूरज की रोशनी को ​परिवर्तित करती है।

यह भी पढ़ें : Jaipur Art Week का हुआ आगाज, कलाकारों ने संस्कृति व पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

यह कृति भारत की जीवंत सांस्कृतिक भावना को दर्शाती है, जहां जीवन को असीम उर्जा और आनंद के साथ जीया जाता है। अरज़ू ने बताया कि वह पहली बार जयपुर आई हैं। पिंकसिटी के बारे में अब तक सुना ही था। यहां आकर लगा कि इस शहर को देखना किसी सपने के सच होने जैसा है। ईरान से जयपुर तक की जर्नी काफी रोमांचक रही है।

अल्बर्ट हॉल पर ही टेक्सटाइल आर्टिस्ट टिंकल खत्री की 'लुक हाउ आई एम मॉर्फिंग अंडर द सन' वॉक थ्रू हुई। इसमें प्राकृतिक रंगों से रंगे ब्लॉक-प्रिंटेड कपड़ों पर राजस्थान की पारंपरिक कारीगरी की खूबसूरती नजर आई। किस तरह से दुनिया में एक जीव जन्म लेता है, उसकी जर्नी को पेंटिंग्स में दर्शाया गया।

टिंकल ने बताया कि वह जयपुर से हैं। उन्होंने अपनी पेंटिंग्स में अंडे से लेकर, नए जीव के जन्म तक की प्रक्रिया को दर्शाया है। सोशल डिज़ाइन कोलैबरेटिव ने सीड्स ऑफ़ यस्टरडे, टुमॉरो प्रस्तुत किया, जिसमें अल्बर्ट हॉल के प्रवेश प्रांगण को राजस्थान की पारंपरिक वास्तुकला से प्रेरित बड़े इंटरेक्टिव मूर्तियों से सजाया गया।

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