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किताबों से शुरू हुई एक प्रेम कहानी...JLF में प्रेमी जोड़ों को भी दे रही प्रेरणा

locationजयपुरPublished: Feb 05, 2024 11:54:09 am

Submitted by:

Ashish sharma

Jaipur Literature Festival 2024 : फ्रंट लॉन में आयोजित सेशन "मिस्टर एंड मिसेज मूर्ति" में एक अनोखी प्रेम कहानी ने बरसात भरे मौसम में प्रेमी जोड़ों का दिल जीत लिया। दरअसल, इस हफ्ते अपनी शादी की 46वीं सालगिरह मनाने वालीं सुधा मूर्ति ने बताया कि कैसे बीते 50 सालों में पहले कोर्टशिप, फिर शादी और उसके बाद उन दोनों ने रोलर - कोस्टर की तरह जीवन में उतार-चढ़ाव देखे हैं।

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किताबें पढ़ने की ललक एक युवा लड़की को अपने साथी कर्मचारी के दोस्त के फ्लैट तक ले आई। लड़का जो देखने में कुछ खास नहीं था लेकिन लड़की को पता चल गया कि वह दिमाग का बहुत तेज है। लड़की जब फ्लैट से निकली तो लड़के ने कहा कि वहां यहां जो चाहे, वो किताबें ले जा सकती है लेकिन साथ ही यह भी कह दिया कि क्या तुम शाम को मेरे साथ डिनर चलोगी। लड़की ने शर्त रखी कि उसका सहकर्मी भी साथ चलेगा। तीनों से साथ डिनर किया। लड़के ने कहा कि तुम जब मेरे फ्लैट में आईं तो ऐसा लगा कि पूरा कमरा रोशन हो गया हो। उसके बाद दोनों मिलने लगे, साथ सपने देखे और एक कंपनी की नींव रखी। वह युवा लड़की थी सुधा कुलकर्णी और वह लड़का था नारायण मूर्ति।

यह किताब उन प्रेमी जोड़ों के नाम जिनके पास सपने हैं लेकिन पैसा नहीं: चित्रा बनर्जी दिवाकरुणी


जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में फ्रंट लॉन में बरसती बारिश दोनों की बयां होती प्रेम कहानी में और रूमानियत घोल रही थी। सेशन मिस्टर एंड मूर्ति में चित्रा बनर्जी दिवाकरुणी की किताब "एन अनकॉमन लव: द अरली लाइव ऑफ सुधा एंड नारायण मूर्ति" पर चर्चा में सुधा और नारायण मूर्ति के जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं से दर्शक रूबरू हुए। चित्रा ने कहा कि वह इस किताब के जरिए उन तमाम प्रेमी जोड़ों को प्रेरणा देना चाहती हैं, जिनके पास सपने हैं लेकिन पैसा नहीं है।

वह और मिस्टर मूर्ति दो विपरीत ध्रुव: सुधा मूर्ति


इस हफ्ते अपनी शादी की 46वीं सालगिरह मनाने वालीं सुधा मूर्ति ने बताया कि कैसे बीते 50 सालों में पहले कोर्टशिप, फिर शादी और उसके बाद उन दोनों ने रोलर - कोस्टर की तरह जीवन में उतार-चढ़ाव देखे हैं।
वह और मिस्टर मूर्ति दो विपरीत ध्रुवों की तरह हैं और शायद इसीलिए एक-दूसरे की ओर आकर्षित हुए। आलिया भट्ट को पसंद करने वाली सुधा को उनकी बेटी अक्षिता ने एक बार उनसे किसी की मदद के लिए कहा, उन्होंने ध्यान नहीं दिया तो उसने कहा कि आपकी जिंदगी का मकसद क्या है। इस सवाल के जवाब ने उन्हें समाज सेवा के लिए प्रेरित किया। JLF में उन्होंने कहा कि शिक्षक परिवार से होने के नाते किताबों के अलावा उन्हें कुछ नहीं सूझा। इसलिए मुनाफा या पैसा उनके लिए कभी महत्त्वपूर्ण नहीं रहे।

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सीखें उनसे

-उन्होंने इंफोसिस की शुरुआत में 10,000 रुपए देने से लेकर कर्मचारियों को सैलेरी देने के लिए गहने गिरवी रखने तक हर हालात में पति का साथ दिया, क्योंकि उन्हें उन पर भरोसा था।
-पति ने उन्हें कहा कि तुम एक्रोबेट या ट्रेपेजी कलाकार की तरह कैसे भी जीवन जीओ, मै तुम्हारी सुरक्षा का ध्यान हमेशा रखूंगा।
-हर पीढ़ी के पास के अपनी चुनौतियां होती हैं, इसलिए वो क्या होंगी, यह अलग बात है।
-पति काम करे तो पत्नी और पत्नी काम करे तो पति हर हालत में सहयोग करे।
-जिंदगी कोई स्मार्टफोन नहीं है कि एक बटन दबाते ही आपको सब कुछ मिल जाएगा।
-आपको कुछ ही हैरिडिटी में नहीं मिलता, सिर्फ बीमारियों के।
-जीवन में कुछ नया करने की शुरुआत आप कभी भी कम कर सकते हैं, उन्होंने 2000 में एक अखबार में कॉलम लिखने से शुरुआत की।
-अपने बच्चों को कभी बहुत ज्यादा सलाह मत दो, जब वे मांगें तभी दो।
-आपकी पोजिशन हमेशा नहीं रहने वाली, इसलिए जो लोग तुमसे गरीब हैं, उनकी मदद करो।
-मां के प्यार के अलावा इस दुनिया में कुछ भी मुफ्त नहीं है।

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