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Women Reservation Bill: आखिर राजस्थान में 28 से ज्यादा महिला विधायक कभी क्यों नहीं चुनी गई?

राजस्थान में 1952 से लेकर 2018 तक के चुनावों में कभी 28 से ज्यादा महिला विधायक नहीं चुनी गई।

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जग्गोसिंह धाकड़/जयपुर. लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पेश होने का देश की राजनीति पर बड़ा असर पड़ेगा। इससे तमाम राजनीतिक दलों पर महिलाओं को अधिक टिकट देने का दबाव होगा। भले ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण वाला बिल इस बार के विधानसभा चुनावों में लागू नहीं हो पाए, लेकिन महिला संगठन महिलाओं को अधिक टिकट देने की मांग करेंगे। ऐसे में राजनीतिक दलों पर पहले से अधिक महिलाओं को उम्मीदवार बनाने का मनोवैज्ञानिक और नैतिक दबाव भी होगा। अभी तक राजनीतिक दल आधी आबादी को पूरा अधिकार देने के दावे तो करते रहे, लेकिन जब टिकट देने का समय आता तो उसमें महिलाओं को बराबरी का हक नहीं दिया गया। पिछले विधानसभा चुनाव 2018 सहित इससे पहले के चुनावों में कांग्रेस और भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों ने महिलाओं को ज्यादा टिकट देने में कभी रुचि नहीं दिखाई। इस बार दोनों प्रमुख दलों में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने टिकट के लिए दावेदारी जताई है। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राज्य में कांग्रेस की करीब 80 महिलाओं ने दावेदारी जताई है। वहीं, इस बार भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं ने भी पहले से ज्यादा संख्या में दावेदारी की है।

पिछले चुनाव का गणित

पिछले चुनाव में भाजपा ने 200 सीटों में से 177 सीटों पर पुरुष प्रत्याशी मैदान में उतारे और 23 महिलाओं को टिकट दिया। कांग्रेस ने 195 में से 168 सीटों पर पुरुष और 27 सीटों पर महिलाओं को प्रत्याशी बनाया। बसपा ने 190 में से 175 टिकट पुरुषों को और 15 टिकट महिलाओं को दिए। सीपीआई ने 16 विधानसभा क्षेत्रों और सीपीएम ने 28 विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा, लेकिन इनमें कोई महिला उम्मीदवार नहीं थी। इनके अलावा अन्य राजनीतिक दलों ने 755 प्रत्याशी विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में खड़े किए और 69 महिलाओं को प्रत्याशी बनाया। वहीं, 55 महिलाओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ा, जिसमें से एक महिला प्रत्याशी ने जीत हासिल की।

महिलाओं ने बढ़ाया कद, दी लोकतंत्र को मजबूती

राज्य में पिछले दो विधानसभा चुनावों में महिलाओं ने रेकॉर्ड कायम किया और दोनों बार पुरुषों से ज्यादा तादाद में पोलिंग बूथ पर पहुंचीं। यह आंकड़ा बताता है कि लोकतंत्र के महोत्सव में आधी आबादी ने अब न सिर्फ पुरुषों की बराबरी कर ली, बल्कि आगे भी निकल रही है। विधानसभा चुनाव 2018 में महिलाओं का मतदान 74.67 प्रतिशत रहा और पुरुष का मतदान 73.49 प्रतिशत रहा। 2013 के चुनाव में महिलाओं का मतदान 75.44 प्रतिशत और पुरुष का मतदान 74.67 प्रतिशत रहा।
जनीतिक दलों के बदले सुर

‘इस बार कांग्रेस महिलाओं को पहले से ज्यादा टिकट देगी। महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधत्व देने पर पार्टी का पूरा जोर है। अभी तक 80 से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। कुछ सीटों पर दो से चार आवेदन भी आए हैं।’
-राखी गौतम, प्रदेश अध्यक्ष महिला कांग्रेस
‘भाजपा महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देगी। इस बार पिछली बार से ज्यादा महिलाओं ने ज्यादा आवेदन किए हैं। अभी यह तय नहीं किया है कि कितनी सीटों पर महिलाओं को टिकट दिया जाएगा।’
-रक्षा भंडारी, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा महिला मोर्चा

चुनाव का वर्ष- महिला प्रत्याशियों की संख्या-चुनी गई
1952 4 0
1957 21 9
1962 15 8
1967 19 6
1972 17 13
1977 31 8
1980 31 10
1985 45 17
1990 93 11
1993 97 10
1998 69 14
2003 118 12
2008 154 28
2013 166 28
2018 189 24


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