शिक्षामंत्री डॉ. बीडी कल्ला का कहना है कि राज्य के विकास में जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में सामंजस्य महत्वपूर्ण है।यदि जनप्रतिनिधि किसी बात के लिए कुछ कहे तो मुंह से उत्तर नहीं देना चाहिए, ऐसा करने का मतलब यह निकाला जाता है कि अधिकारी बात नहीं करना चाहता।
अखिल भारतीय राज्य नागरिक व प्रशासनिक सेवा महासंघ (All India State Civil and Administrative Service Federation) का अधिवेशन (Convention) के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.कल्ला ने कहा कि शिक्षामंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने कहा है कि आम लोगों और प्रशासन में तालमेल में फैडरेशन की भूमिका अहम है। अनुभव साझा करने स्वास्थ्यए अन्य क्षेत्रों में बेस्ट प्रेक्टिस की मिलती जानकारीए आपसी समस्या भी होती साझाए विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीन प्रमुख स्तंभ हैं। दूसरे राज्य से आने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी का स्थानीय संस्कृति और भौगोलिक परिस्थितियों का ज्ञान नहीं होता जो राज्य सेवा से जुड़े अधिकारी समझते हैं। ऐसे में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कह कि मुझे 24साल का प्रशासनिक अनुभव है। मेरा मानना है कि राज्य की आय, वेतन, पेंशन और विकास आदि के लिए कर्ज लेना पड़ता है। ऐसे में फिजूलखर्ची को रोकना जरूरी होगा। प्रशासनिक खर्च किस प्रकार से कम किया जाए इस पर ध्यान देने की जरूरत है। जब जनप्रतिनिधि जनसुनवाई करते हैं ऐसे में प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी उपस्थित रहे तो बेहतर होगा। उनका कहना था कि आईएएस अधिकारियों के समान राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए विदेशों में एकेडमिक एक्सीलेंस जैसा प्रोग्राम होना चाहिए।
राजस्व संबंधी नियमों में बदलाव की जरूरत- रामपाल जाट
इस अवसर पर राजस्व मंत्री रामपाल जाट ने कहा कि राजस्व संबंधी पुराने नियमों को बदलने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इसके लिए कमेटी बनाकर काम होना चाहिए। उनका कहना था कि एसडीओ पर जनप्रतिनिधियों को भी काफी निर्भर रहना पड़ता है। कोविड जैसी परिस्थितियों में जब लोग भाग जाते हैं, उन परिस्थितियों में भी आप लोगों ने मजबूती के साथ काम किया इसके लिए राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी बधाई के पात्र हैं।
महासंघ की कार्यकारी समिति और आमसभा की बैठक भी
अधिवेशन में ‘सरकारी संघवाद के नए प्रतिमान में भारतीय गणतंत्र के वर्ष विकासशील शासन संरचना में एससीएस अधिकारियों की भूमिका दृष्टिकोण में धीरे-धीरे बहाव आगे का रास्ता’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। सेमिनार आरएएस क्लब और एचसीएम रीपा (ओटीएस) में होंगे। अधिवेशन के दौरान राज्य सिविल और प्रशासनिक सेवा से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श करने के लिए महासंघ की कार्यकारी समिति और आमसभा की बैठक भी होगी।
इन मुद्दों पर भी होगी चर्चा
आईएएस भर्ती उपनियम 4 ( 1) (सी) और( 8) (2) नियम 1954 और आई ए एस चयन द्वारा नियुक्ति विनियम् 1997 को रद करना क्योंकि गैर-एससीएस अधिकारियों का आईएएस में चयन करने के लिए ना तो कोई विशेष मामला-विशेष परिस्थितियां मौजूद हैं और ना ही अत्यावश्यकता है क्योंकि विभिन्न राज्यों में उत्कृष्ट योग्यता, क्षमता और त्रुटिहीन सत्यनिष्ठता,20 वर्ष से अधिक सेवारत एससीएस अधिकारी पदोन्नति के लिए उपलब्ध है। -एससीएस अधिकारियों के आईएएस में पदोन्नति के लिए आईएएस कैडर संख्या के अवकाश आरक्षित घटक को शामिल करने
-आईएएस वरिष्ठता विनियमन नियम, 1987 के नियम 3 (3) (।।) में उपयुक्त संशोधन करना जिससे अधिकारियों को आईएएस में पदोन्नति होने पर उनकी एससीएस की सेवा में पहले आठ वर्षों के लिए 4 वर्षों की वरिष्ठता मिले और इसके बाद हर एक वर्ष पूरा होने पर एक वर्ष की वरिष्ठता मिले। यह क्रम पदोन्नति के वर्ष तक जारी रहे।
राज्य सरकारों से संबंधित मुद्दे:
– राज्य सिविल सेवा के केडर पदों में वरिष्ठ पदोन्नति पदों की संख्या में वृद्धि करना क्योंकि विभिन्न राज्यों में एससीएस अधिकारी की आईएएस में पदोन्नति में 20 वर्ष से अधिक का समय लग रहा है। – देश भर में एससीएस अधिकारियों का समान वेतनमान।
-माडल एससीएस नियम और विनियम 2023 के आधार पर समान एससीएस नियमों और विनियमों को अधिसूचित करना। – दीर्घकालिक विदेशी प्रशिक्षण सहित एससीएस अधिकारियों के लिए एक समान मजबूत प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करना।
– एससीएस अधिकारियों की वर्ग 1 प्रथम श्रेणी स्तर पर भर्ती करना। कुछ राज्यों में इन अधिकारियों की भर्ती वर्ग 2 द्वितीय श्रेणी स्तर पर की जा रही हैं।